पाकिस्तानी बहनें जेल से रिहा, फेक करंसी-हेरोइन रखने के केस में हुई थी सजा
मुमताज, फातिमा और उनकी मां रशीदा को 8 मई 2006 को अटारी बॉर्डर से अरेस्ट किया गया था।
यहां की सेंट्रल जेल में बंद पाकिस्तानी बहनें फातिमा और मुमताज को गुरुवार को रिहा कर दिया गया। इन्हें जाली करंसी और हेरोइन रखने के मामले में सजा हुई थी। बता दें कि दोनों बहनों और उनकी मां रशीदा को समझौता एक्सप्रेस से अरेस्ट किया गया था। कैद के दौरान मां की मौत हो गयी थी। मुमताज ने जेल में ही बेटी को जन्म दिया था। रिहाई के बाद तीनों काफी खुश दिखीं। हिना ने कहा- मैं अपनी खुशी शब्दों में बयां नहीं कर सकती।
उधर, फातिमा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया। उसने कहा कि मोदीजी ने हमारे केस पर विशेष ध्यान दिया था।
क्या था ये मामला
- 8 मई 2006 को मुमताज, फातिमा और उनकी मां रशीदा अपने परिवार के साथ समझौता एक्सप्रेस से भारत आ रही थीं। चेकिंग के दौरान उनके पास से फेक इंडियन करंसी मिली। इसके बाद उनको जेल भेज दिया गया था।
- सजा पूरी होने के बाद जब ये रिहा होने लगीं तो जब्त किए गए उनके सामान से हेरोइन की पांच खेप पकड़ी गई, जो चेकिंग में कोताही के कारण नहीं पकड़ी जा सकी थी। इसके बाद इनको दोबारा जेल भेज दिया गया था। इनकी सजा नवंबर 2016 को पूरी हो गई थी।
कितनी सजा मिली?
- तीनों को 10-10 साल की सजा तथा दो-दो लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया।
मां का जेल में निधन, मुमताज ने दिया बेटी को जन्म
- जब इन्हें अरेस्ट किया गया, तब मुमताज प्रेग्नेंट थीं। कुछ वक्त बाद उसने बेटी को जन्म दिया, जिसका नाम हिना रखा गया। कैद के दौरान 65 साल की रशीदा का निधन हो गया। भारत सरकार ने उसकी बॉडी को पाकिस्तान सरकार को सौंप दी थी।
हिना को तोहफे में मिली सोने की चेन
- एडवोकेट नवतेज कौर इनकी रिहाई के मौके पर बार्डर पर मौजूद थीं। नवतेज ने फल के अलावा दोनों बहनों को 2-2 सलवार-सूट खरीदकर दिए हैं। हिना को उन्होंने 70 हजार रुपए की सोने की चेन गिफ्ट की। इसके लॉकेट पर भारत-पाकिस्तान का झंडा उकेरा गया है।
- महिला एडवोकेट नवजोत कौर चब्बा अक्सर जेल में कैदियों से मिलती रहती थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात इन बहनों से हुई।


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