अगर आप भी हैं नमकीन खाने के शौकीन, तो ये फोटोज देख कर लेंगे इससे तौबा
त्योहार आते ही फूड डिपार्टमेंट की टीम सक्रिय हो गई है। बाजार में बिक रही खाने-पीने की चीजों जांच के लिए अफसर मैदान में उतर गए हैं। वे मिठाइयों को सूंघ और होटलों व रेस्टोरेंट में खाने को चखकर चेक कर रहे हैं कि कहीं ये बासी या मिलावटी माल तो नहीं बेच रहे हैं। इन सबके बीच हम ने खाद्य और औषधि विभाग की टीम के आंकड़े निकाले तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। इंदौर जैसे बड़े शहर में जहां 30 हजार से ज्यादा दुकानें हैं, वहां सैंपल लेने के लिए 12 कर्मचारियों की टीम है, जो बिकने वाली सामग्री की जांच करेगी।
- खाद्य सुरक्षा अधिकारी मनीष स्वामी का कहना है कि त्योहार के सीजन में सबसे ज्यादा मिलावट मावे में ही होती है। इसका कारण यह है कि बाजार में मिठाई की मांग बढ़ जाती है और मावे की आवक मांग के अनुसार नहीं होती। ऐसी स्थिति में कुछ व्यापारी मावे में आलू और तेल मिलाकर उसकी क्वांटिटी बढ़ा देते हैं। कुछ लोग मावे में अरारोट और ज्वार का आटा भी मिला देते हैं। ऐसा नकली मावा कई बार पकड़ा जा चुका है। इस बार भी मावे की जांच पर जोर रहेगा।
- विभाग के अफसरों का दावा है कि दीपावली को देखते हुए दर्जनभर कर्मचारियों को सैंपल लेने के लिए लगाया गया है। रोजाना 30 दुकानों पर दस्तक दी जा रही है। अब तक २००, से ज्यादा दुकानों पर जांच की जा चुकी है। दीपावली में अभी 10 दिन बाकी हैं। इस लिहाज से 300 दुकानों की जांच कर ली जाएगी। इस पूरे सीजन के आंकड़े पर नजर दौड़ाएं तो पता चलता है कि यह टीम 500 सैंपल ही ले सकेगी। वहीं दूसरी ओर इसी विभाग ने पिछले साल दीपावली के सीजन में 250 के करीब सैंपल लिए थे। सवाल यह है कि 29,500 दुकानों का क्या होगा, जहां धड़ल्ले से मिठाई और नमकीन बेचा जाएगा।
1 लाख किलो से ज्यादा नमकीन रोज बिकता है त्योहारी सीजन में।
- 25 हजार किलो नमकीन रोजाना बिकता है अपने शहर में, बाहर भी जाता है।
- 29 हजार से ज्यादा छोटी दुकानें हैं, मिठाई और नमकीन की।
- 300 किलो मावे की खपत हर दिन होती है शहर में।
- ४५०, से ज्यादा मिठाई और नमकीन की बड़ी दुकानें हैं।
-1500 किलो से ज्यादा मावे की रोज खपत होती है त्योहारी सीजन में।
दीपावली सीजन में २५०, से ज्यादा सैंपल लिए इसमें से 13 नमूने फेल हुए, 8 केस भी दर्ज हुए और 95 हजार रुपए अर्थ दंड वसूला गया।
- पिछले साल 1738 सैंपल भेजे गए थे। इनमें से 116 नमूने फेल हुए और 124 प्रकरण दर्ज हुए। इनसे 33 लाख 75 हजार रुपए अर्थ दंड वसूला गया।
खाद्य एवं औषधि विभाग द्वारा सैंपल लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नगर निगम की टीम को भी जोड़ा गया है। व्यापारियों से कहा गया है कि वे मिलावटी सामग्री न बेचें। विभाग के पास बड़ा अमला नहीं है। बावजूद इसके कोशिश यही रहेगी कि अपने शहर के लोगों को मिलावटी सामान न मिले। मनीष स्वामी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी

Post a Comment