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40 सालों से भारत में रहकर गौसेवा कर रही है ये जर्मन महिला, 1200 गाय का रखती है ख्याल


सिर्फ भारतीय नहीं है जो भारतीय समाज में बदलाव करने की सोच रखते है। 59 साल की जर्मनी महिला फ्रिडेरेकी इरिना ब्रूनिंग 1200, से अधिक गायों को लिया है और मथुरा में स्वास्थ्य के लिए उन्हें नर्सिंग कर रही हैं। सोचकर आपको भी थोड़ा आश्चर्य हो रहा होगा, लेकिन ये बिलकुल सच है।

जर्मनी के बर्लिन शहर की रहने वाली फ्रेडरिक इरीना 40 साल पहले भारत घूमने आईं थी। ब्रज में आकर मंत्र दीक्षा ली। फिर हमेशा के लिए सुदेवी दासी बनकर यहीं की हो गईं। 2 मार्च 1958 में जर्मनी के बर्लिन शहर में जन्मी फ्रेडरिक इरिन ब्रूनिंग ने गौवंश की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया है।  फ्रेडरिक ने बताया कि वो साल 1978 में भारत घूमने के लिए आई थीं। यहां ब्रज में उन्होंने गुरु दीक्षा ली। जिसके बाद वो सुदेवी दासी बनकर गोवर्धन में रहने लगी।

सुदेवी दासी ने बताया कि 20 साल पहले रास्ते में उन्हें एक बछड़ा पड़ा मिला। जिसकी वो सेवा करने लगी। धीरे धीरे सुदेवी दासी का गायों के प्रति लगाव बढ़ने लगा। सड़कों पर घूमने वाली बीमार गायों की दशा देखकर उन्हें बहुत दुख होता था।

जिससे उन्होंने गायों की सेवा करने की ठान ली। गायों और बछड़ों की संख्या बढ़ने पर उन्होंने कोन्हई गांव के खेतों में जमीन खरीद कर गौशाला बनाया। जहां आज लगभग 1200 से अधिक गाय, बैल और बछड़े पाले जाते हैं।

उनका कहना है कि भारतीय सरकार ने उसे लम्बे समय तक वीजा नहीं दिया है, जो कि मेरे लिए एक और मुद्दा है; उन्हें हर साल वीजा नवीनीकृत करना पड़ता है। वो आगे बताती है कि मैं भारतीय राष्ट्रीयता नहीं ले सकती क्योंकि मैं बर्लिन से आने वाली इनकम खो दूंगी। मेरे पिताजी भारत में जर्मन दूतावास में काम कर रहे थे, उन्हीं के पैसे में गौशाले पर इस्तेमाल करती हूं।