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Bhaskar Sting : जहां जिंदा जले थे 8 लोग, वहां चुनरी के पीछे छिपा रखा था ये सब



जिस रानीपुरा में छह महीने पहले पटाखा दुकान में भीषण आग लगने के बाद आठ लोग जिंदा जल गए थे। वहां पुलिस चौकी के ठीक सामने की दुकानों में पटाखे बेचे जा रहे हैं। बस फर्क इतना है कि पहले खुलेआम बेचे जाते, अब चुनरी और खिलौनों के पीछे से। दैनिक भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन के बाद पुलिस-प्रशासन हरकत में आया और गुरुवार को रानीपुरा स्थित कई दुकानों पर छापेमारी की। जिस दुकान का स्टिंग किया गया था, वहां से टीम को 28 बोरे पटाखे मिले हैं।


- सीएसपी बीपीएस परिहार, टीआई सेंट्रल कोतवाली कर्णिसिंह शक्तावत के साथ सुबह दो थानों का फोर्स सुबह परमानंद फायर वर्क्स पर पहुंचा। यहां दुकान जैसे ही खोली वैसे ही अंदर के सभी रैक पटाखों से भरे मिले। इनमें लाखों के पटाखे भरे हुए थे। दुकानदार परमानंद बालचंदानी और उसके बेटे भल्ला और अशोक को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद पुलिस और प्रशासन की टीम अन्य दुकानों पर पहुंची। यहां से भी रोल कैप व अन्य पटाखे जब्त किए गए।


- रानीपुरा स्थित पुलिस चौकी के ठीक सामने 37 रिवर साइड रोड पर परमानंद फायर वर्क्स के नाम से दुकान है। भास्कर रिपोर्टर यहां ग्राहक बनकर दुकान पहुंचे यहां दुकान के बाहर पटाखा दुकान का ही बोर्ड लगा था, लेकिन दुकानदार ने दिखावे के लिए बाहर खिलौने वाली पिस्तौल टांग रखी थी और अंदर पूरी दुकान में चुनरियां रखी थीं। काउंटर पर भी चुनरियां रखी थीं। इससे देखने वाले को लगे कि यह चुनरी की दुकान है।



- रानीपुरा क्षेत्र के सभी व्यापारियों को शहर के अन्य स्थाई लाइसेंसी पटाखा व्यापारियों की तरह ही रीजनल पार्क के सामने स्थान दिया गया है। उन सभी दुकानदारों की रानीपुरा में दुकाने हैं। ज्यादातर दुकानों से पटाखे के बोर्ड हटाए जा चुके हैं। यहां फैंसी आयटम, राखियां, कपड़े दुकानों के बाहर डिस्प्ले में लगाए गए हैं। इनके पीछे कई दुकानदार अभी भी पटाखे बेच रहे हैं। साथ में वे अपनी रीजनल पार्क वाली दुकान का कार्ड भी ग्राहक को देते हैं। इस तरह उनकी दो दुकानों से पटाखों का कारोबार संचालित होने लगा है।



सभी पटाखा दुकानों के लाइसेंस प्रशासन ने रद्द कर रखे हैं। रहवासी और घनी आबादी वाले क्षेत्र में पूरे शहर में कहीं अनुमति नहीं दी गई है। सभी को रीजनल पार्क या राऊ में स्थानांतरित किया गया है। हमारी जानकारी में रानीपुरा में कोई दुकानदार अब पटाखों की कारोबार नहीं कर रहा है। अगर अभी भी कोई वहां से पटाखे बेच रहा है तो इसके लिए वह खुद जिम्मेदार है।


- रानीपुरा अग्निकांड के बाद डीआईजी ने सबसे पहले सेंट्रल कोतवाली थाने के टीआई, बीट अधिकारी सहित छह लोगों को लाइन अटैच कर दिया था। इसी बात के निर्देश पिछले दिनों हुई त्यौहारों की मीटिंग में भी दिए गए थे। डीआईजी ने स्पष्ट कहा था कि अगर कही पटाखे बिके तो वह थाने की जिम्मेदारी होगी। कहीं और नहीं उसी सेंट्रल कोतवाली थाना क्षेत्र में उसी घटनास्थल से महज 150 कदम की दूरी पर पटाखे खुलेआम बिक रहे हैं।



 6 अक्टूबर 2011 को राऊ में पटाखा फैक्टरी में निर्माण के दौरान हुए ब्लास्ट में आठ लोगों की जान गई थी। इस ह्रदयविदारक घटना के बाद तत्कालीन डीआईजी ए. सांई मनोहर (फिलहाल सीबीआई, दिल्ली में पदस्थ) ने एक स्पेशल टीम बनाई थी। टीम ने पटाखा माफिया की पोल खोलती गोपनीय रिपोर्ट तैयार कर अनुशंसाओं के साथ जिला प्रशासन और सरकार को भेजी थी।

- 12 सितंबर 2015 की सुबह को झाबुआ जिले के पेटलावद में डेटोनेटर की दुकान में भीषण विस्फोट हुआ था। इसमें लगभग 105 लोगों की मृत्यु हो गई थी। इस घटना के बाद भी इंदौर के पटाखा कारोबार को लेकर प्रशासन ने लाइसेंस निरस्त कर दिए थे लेकिन उस पर अमल नहीं हो सका, जिसका खामियाजा रानीपुरा में देखने को मिला।


- रानीपुरा मेन रोड की दुकानों में खिलौना बंदूकों की आड़ में पटाखे बेचे जा रहे हैं। भास्कर ने लक्ष्मी और राज एन 146 रानीपुरा से रोलकेप खरीदे। इन रोलकेप में भी बारूद भरा होता है और यह खिलौना बंदूक के साथ चलाए जाते हैं।


- इसके अलावा भास्कर ने कुछ होलसेल एजेंसी पर भी पड़ताल की। यहां पटाखों की बुकिंग की जा रही थी। विनायक एजेंसी के काउंटर पर बैठे दुकानदार ने कहा कितने पटाखे चाहिए, यहां बुकिंग करा दो। पीछे गोदाम हैं, माल वहां से डिलीवर किया जाएगा। दुकानदारों ने यह भी कहा कि अभी सख्ती चल रही है। खुले पटाखे चाहिए तो दो दिन बाद आना, फिर यहीं दुकानें लगने वाली हैं।