अमिताभ का 13 साल पुराना इंटरव्यू, अमीर दिखने दोस्तों से मांगते थे गाड़ी
अमिताभ बच्चन आज 75 वर्ष के हो गए हैं। उनका जन्म 11 अक्टूबर, 1942 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद मे हुआ था।
लोग कहते हैं असली अमिताभ बच्चन को कोई नहीं जानता। कभी उनके अंदर लावा उबलता रहता था। कभी वे नपे-तुले शब्दों में खामोशी से बात करते हैं।
कभी चुपके-चुपके से हंसोड़ हो जाते हैं। अब वे सबसे चमकदार, सर्वाधिक प्रिय और विनम्र बुजुर्ग की तरह तारीफों की बौछारों के बीच शान से सबसे उंचे अदाकार की तरह खड़े हैं।
वे चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक, च्यवनप्राश, केश तेल, सूट या दीवारों पर लगने वाले पेंट तक की सिफारिश करते नजर आ सकते हैं।
बता दें कि एक दौर ऐसा भी रहा जब अमिताभ बच्चन ने अमीर दिखने के लिए दोस्तों से उनके घर में गाड़ियां खड़ी रखने के लिए कहा था।
जंजीर, दीवार के दहकते अंतरमुखी नायक से कौन बनेगा करोड़पति और बागबां तक एक के बाद एक नया अमिताभ खुलता जाता है।
कभी दुर्घटना से जूझते कभी राजनीति में फंसते, कभी कंपनी के घाटे और घटती फिल्मों के भंवर में डूबते-उतरते अमिताभ ने साबित कर दिया है कि जिंदगी की ऊंचाइयां भीतर की ताकत से आती है।
खासकर ऐसे पेशे में जहां महज एक फिल्म की सफलता से लोगों के पैर जमीन पर नहीं टिकते, वहां अमिताभ बच्चन की विनम्रता वाकई लाजवाब है।
उन्होंने अभिनय की सही परिभाषा फिर से परिभाषित की है। कौनसी ऐसी बात है जो चार पीढियों को एक साथ चमत्कृत करती है? उनकी तारीफ करें तो वे खुद ऑ गॉश कहकर टाल देते हैं।
अब आप ही बताइये कि कोलकाता में उनकी मूर्ति की पूजा हो रही है या उन पर एक परफ्यूम निकलता है तो गलत क्या है?
वे अपने समय को मुट्ठी में कर चुके शोबिज के भी सर्वाधिक प्रिय सीनियर सिटीजन हैं। सिर्फ उम्र के नाम पर या अनुभव के बनाने नहीं उनका कद तो हर अदाकार से कहीं ऊंचा है....बहुत ऊंचा।
इस ऊंचाई पर जिंदगी कैसी है, अमिताभ ने जुहू स्थित अपने बंगले प्रतीक्षा पर आहा!
जिंदगी से 13 साल पहले 2004 में दो हिस्सों में हुई लंबी बातचीत के दौरान रमेश निर्मल को बताया था । आज उसी इंटरव्यू बातें बता रहा है।
सात हिंदुस्तानी से सर्वाधिक लोकप्रिय हिंदुस्तान तक अमिताभ के जीवन में क्या कुछ बदला है?
नहीं मैं तो वही हूं। मेरी इस उम्र में , मेरे पेशे से जुड़े कुछ खास काम निश्चय ही बदले हैं।
पहले मैं मुख्य भूमिकाएं किया करता था, अब मैं चरित्र भूमिकाएं करता हूं, जो मेरी उम्र के लिए ज्यादा सूट करती हैं। बीच में मैने टीवी पर भी काम किया, जो फिल्मों से बाहर का था कौन बनेगा करोड़पति। अच्छा लगा और मैंने वह किया।
मैं विज्ञापन इसलिए करता हूं कि उससे मेरी कंपनी एबी कॉर्प की ब्रांड इक्विटी बनाने में मदद मिली है। उसे फंड की बेहद जरूरत है। मैं इसके लिए अधिकतम योगदान करने की कोशिश करता हूं।
जीवन के नए अनुभवों ने क्या सिखाया?
मैं व्यवहारकुशल कतई नहीं रहा और उसी का नतीजा था लेन-देन का हिसाब- किताब मुझसे संभल नहीं पाया।
एबीसीएल में अजिताभ यह सब देख लेते थे, लेकिन उनके अपने कारोबार के सिलसिले में लंदन जा बसने के कारण मैने सारी चीजें मैनेजरों के विश्वास में छोड़ दी ।
नतीजा ऐसा हुआ कि वास्तविक नियंत्रण नहीं रह पाया। कंपनी फेल हो गई और करोड़ों का कर्जा चढ़ गया। मैं दिन-रात सोचने लगा कि यह सब कैसे, कब और क्यूं होता चला गया।
मुझे लगा कि जिन तीसरे हाथों पर मैं पूरा विश्वास करता था, वे मुझे घुन की तरह कुतर-कुतर कर खा रहे थे। 90 करोड़ का कर्ज मेरे सिर पर था।
अदालतों में पचपन केस लग गए। मेरे पास केवल एक घर बचा था। और उर पर भी कुर्की का आदेश था।
फिर कैसे अपने आपको संभाला?
मैं भीतर ही भीतर घुट रहा था। मैने जब अपना सूरज खूब तेजी से चमकते देखा, तब भी उसकी रोशनी में अपनी काम रोज की तरह करते रहने का का संकल्प बनाए रखा था, क्योंकि मुझे इस बात का अहसास था कि खूब रोशनी दार सूरज के बाद भी शाम आती है और फिर रात का घना अंधेरा भी आता है। इसलिए मैं विचलित नहीं हुआ।
रातें सोचने में गुजरती थीं। वे स्थितियों में भी संयम बना रहा। एक गहरा शून्य कई दिनों तक मुझे डराता रहा ।
मित्रों ने सलाह दी की बड़े-बड़े अमीरों ने भी ऐसे हालातों में दिवाला घोषित किया है और फिर तिनका तिनका जोड़कर खुद को फिर संभाला है।
सो तुम भी ऐसा क्यों नहीं कर लेते? लेकिन मेरी आत्मा ऐसा करने को नहीं कहती थी। मैने इस स्थितियों में भी थोड़ा कर्ज लिया और परिवार की आवश्यकताओं को पूरा किया, लेकिन इस बात की भनक घर वालों को नहीं लगी।
टीवी वाले मेरे घर नीलामी होने का समाचार पाकर अपना कैमरा लेकर घर के बाहर आ गए। मना किया तो कुछ लोग कहने लगे कि आप यहां से फोटो नहीं लेने देंगे तो पड़ोस की छत से ले लेंगे।
मैंने अपने घर और आसपास की मरम्मत कराई।
मेन गेट बदलवाया और अपने मित्रों से कहा कि वे अपनी गाड़ियां मेरे पोर्टिको में पार्क कर दिया करें, ताकि लोगों को लगे कि मेरे पास गाड़ियों का काफिला पहले की तरह ही है।


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