Header Ads

यहां लगा था TATA का पहला स्टील प्लांट, जगह को ढूंढने में लगे थे 3 साल


जमशेदपुर का दूसरा नाम टाटानगर भी है। यह झारखंड के दक्षिणी हिस्से में स्थित पूर्वी सिंहभूम जिले का हिस्सा है। जमशेदपुर की स्थापना जमशेदजी नुसेरवांजी टाटा ने की थी। 1907 में टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (टिस्को) की स्थापना से इस शहर की बुनियाद पड़ी। इस जगह की तलाश में भूवैज्ञानिकों को करीब 3 साल का वक्त लगा था

ऐसा माना जाता है कि 19 वीं शताब्दी के आस पास जमशेदजी टाटा पिट्टसबर्ग गए थे और वहां के भूवैज्ञानिकों से मदद मांगी कि वह उनके लिए एक ऐसी जगह चुने जहां वो अपने सपने, भारत के पहले स्टील कंपनी की स्थापना कर सकें।

-ऐसी जगह की खोज में करीबन 3 साल लग गए जो प्राकृतिक संसाधन के मामले में संपन्न हो। ऐसी जगह अंततः मिल गई। जो आज जमशेदपुर के नाम से जाना जाता है।

-इससे पहले यह साकची नामक एक आदिवासी गांव हुआ करता था। यहां की मिट्टी काली होने के कारण यहां पहला रेलवे-स्टेशन कालीमाटी के नाम से बना, जिसे बाद में बदलकर टाटानगर कर दिया गया।

-जमशेदपुर को पहले साकची के नाम से जानते थे और 1918 में इस जगह का नाम साकची से बदलकर जमशेदपुर रखा गया और यह इसके संस्थापक जमशेदजी नुसेरवांजी टाटा को श्रद्धांजलि देते हुए किया गया।

-खनिज पदार्थों की प्रचुर मात्रा में उपलब्धता और खड़कई तथा सुवर्णरेखा नदी के आसानी से उपलब्ध पानी, तथा कोलकाता से नजदीकी के कारण यहां आज के आधुनिक शहर का पहला बीज बोया गया।

-जमशेदपुर आज भारत के सबसे प्रगतिशील औद्योगिक नगरों में से एक है। टाटा घराने की कई कंपनियों के प्रॉडक्शन यूनिट जैसे टिस्को, टाटा मोटर्स, टिस्कॉन, टिन्पलेट, टिमकन, ट्यूब डिवीजन, इत्यादि यहीं हैं।

-यहां पर भारत का सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र आदित्यपुर है, जहां पर १०००, से भी ज्यादा छोटे और बड़े तबके के उद्योग हैं।


जुबली पार्क यहां का काफी प्रसिद्ध पार्क है। यह पार्क टाटा स्‍टील ने अपने 50 वर्ष पूरे करने के बाद बनवा कर यहां के निवासियों को तोहफे में भेंट की थी।

-225 एकड़ भूमि में फैले इस पार्क का उद्घाटन 1958 ई. में उस समय के तत्‍कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने किया था।

-वृंदावन गार्डन की तर्ज पर बने इस पार्क में गुलाब के लगभग एक हजार किस्‍म के पौधे लगे हुए हैं। इस पार्क में एक चिल्ड्रेन पार्क भी है।

-हाल में ही यहां एक एम्‍यूजमेंट पार्क का निर्माण किया गया है। एम्‍यूजमेन्‍ट पार्क में अनेक किस्‍म के झूले लगे हुए हैं। हरेक साल 3 मार्च को जमशेदजी नुसेरवांजी टाटा की याद में पूरे पार्क को बिजली के रंगीन बल्वों द्वारा बडे़ भव्‍य तरीके से सजाया जाता है।

-इस दिन पूरे विश्‍व से हजारों की संख्‍या में लोग यहां इस कार्यक्रम में शरीक होने आते हैं। यह कार्यक्रम तीन दिनों तक चलता है।