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ये है लंदन की सड़कों के नीचे छुपी हुई दुनिया, हाेते हैं ऐसे रोमांचक नजारे


आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है कि मॉडर्न लंदन में जमीन के अंदर एक अलग ही सीक्रेट वर्ल्ड काम करता है। वहां सड़क के नीचे ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल के लिए बनवाया गया वॉर बंकर है, एक विक्टोरिया कालीन सड़क है, 19वीं सदी का सीवेज सिस्टम है और टेम्स नदी के अंदर पैदल चलने वालों के लिए एक टनल भी है।

 इसके अलावा एक रेलवे सिस्टम भी है, जहां चिट्ठियां लाने-ले जाने के लिए 75 साल से ज्यादा तक रेलगाड़ियां चलती रहीं। अब इस मेल रेल ट्रैक को आम पब्लिक के लिए खोल दिया गया है। लोग पहली बार इस रहस्य से रूबरू हो रहे हैं, जो इतने बरसों तक उनके पैरों के नीचे काम करता रहा। ऐसा है मेल रेल सिस्टम...

-यह मेल रेल सिस्टम 2003 में बंद कर दिया गया था, क्योंकि ईमेल और एसएमएस के जमाने में चिट्ठियों की संख्या काफी घट गई थी।

-उसके पहले करीब 75 वर्ष तक यह सिस्टम, हर दिन 22 घंटे काम करता रहा। इस रेलवे लाइन पर बिना ड्राइवर वाली छोटी, इलेक्ट्रिक रेलगाड़ियां चलती थीं, जिन पर चिट्ठियों के बाेरे लादकर एक से दूसरे स्टेशन भेजे जाते थे।

-इस रेल सिस्टम का निर्माण 1914 में शुरू हुआ और 1927 में इसने काम करना आरंभ किया। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई थी, ताकि चिट्ठियों का जल्दी वितरण किया जा सके। इस रेल सिस्टम के विभिन्न रूट्स पर कुल 15 ट्रेंनें चलती थीं।

-जमीन से करीब 75 फीट नीचे के इस रेल सिस्टम तक सिर्फ 200 लोगों को पहुंचने की इजाजत थी, जिनमें इंजीनियर, डाक विभाग के कर्मचारी और मेंटनेंस फिटर शामिल थे।
-इस सिस्टम की स्थापना ब्रिटिश संसद के आदेश से आम जनता की सुविधा के लिए की गई थी। इसलिए ट्रेनों का संचालन बंद होने के बाद भी इसके मेंटनेंस और सुरक्षा के लिए 3 कर्मचारी तैनात किए गए।
पब्लिक के लिए खुली एक रोमांचक दुनिया

-हाल ही में मेल रेल सिस्टम के एक हिस्से को पब्लिक के लिए खोला गया है। यहां लोग छोटी, ड्राइवरलेस रेलगाड़ी पर बैठकर कुछ किलोमीटर के ट्रैक पर सफर कर सकते हैं। यह रेलगाड़ी बिजली से चलती है। यह भूमिगत खदानों में चलने वाली रेलगाड़ी की तरह है।

-जमीन के नीचे इस सिस्टम को देखने के लिए लोग इतने राेमांचित हैं कि अगले महीने तक के सारे टिकट बुक हो चुके हैं और लोग टिकट के लिए शाही परिवार के सदस्यों से सिफारिश करवा रहे हैं।
-इस रेल के लिए बड़ों का टिकट 1,300 रुपए के करीब और बच्चों का 650 रुपए के करीब है। हाल ही में इस रेल सिस्टम के डेवलपमेंट के लिए 218 करोड़ रुपयों के बराबर राशि स्वीकृत की गई है।