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तड़प रहे लोगों को देख कार रुकवा दौड़ीं लेडी SDM, यूं बचाईं 4 की जान


हादसे में शशिकुमार लोबो की मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी, पिता और दो बच्चे घायल हो गए। पिता की हालत गंभीर बताई जा रही है।

देवास-भोपाल बायपास पर गुरुवार को हुए एक हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि परिवार के चार लोग घायल हो गए। हादसे के बाद इंदौर की एसडीएम शालिनी श्रीवास्तव वहां से गुजरी तो चार लोग सड़क पर तड़प रहे थे, जबकि एक व्यक्ति स्टेयरिंग में फंसा हुआ था। यह देखते ही उन्होंने अपनी कार रुकवाई और मदद के लिए दौड़ पड़ीं। पहले तो उन्होंने स्टेयरिंग में फंसे व्यक्ति को लोगों की मदद से बाहर निकाला, फिर सभी घायलों को लेकर अस्पताल पहुंच गईं।

- प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार देवास-भोपाल रोड पर सुबह करीब 9 बजे भोपाल चौराहे के पास जाम लगा हुआ था। जाम खुलने पर जब लोग आगे बढ़े तो सामने दिलदहलाने वाला नजारा दिखाई दिया। यहां एक कार पूरी तरह से क्षतिग्रस्त खड़ी थी और चार घायल मौके पर तड़प रहे थे। कुछ लोग एक घायल व्यक्ति को कार से निकालने की कोशिश कर रहे थे। तभी एक सरकारी गाड़ी वहां आकर रुकी और उसमें से एक महिला निकली।

- महिला ने गाड़ी से उतरते ही घायलों की ओर दौड़ लगा दी। घायल बुरी तरह से तड़प रहे थे और कुछ लोग औजारों से कार को काटकर स्टेयरिंग में फंसे व्यक्ति को निकालने की कोशिश कर रहे थे। जब उन्होंने मौके पर मौजूद लोगों से एंबुलेंस के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि एंबुलेंस आने में देर लगेगी।

- इस पर महिला ने अपने साथ आए पुलिसकर्मी को घायलों को गाड़ी में बिठाने को कहा। तब तक स्टेयरिंग में फंसे व्यक्ति को भी निकाला जा चुका था और पुलिस भी मौके पर पहुंची चुकी थी। महिला ने पुलिस अधिकारी को अपना परिचय देते हुए बताया कि वे इंदौर एसडीएम शालिनी श्रीवास्तव हैं। उन्होंने तीन घायल को अपनी गाड़ी में बिठाया और बाकी दो घायलों को पुलिस की गाड़ी में बिठवाया और अस्पताल पहुंच गईं।

- एसडीएम श्रीवास्तव ने बताया कि घटनास्थल से ही उन्हाेंने देवास कलेक्टर सर को कॉल कर उनसे अस्पताल में इलाज की व्यवस्था करवाने का आग्रह किया था। अस्पताल पहुंचते ही घायलों का इलाज शुरू हो गया, लेकिन एक घायल को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। बाद में घायलों के परिजनों को सूचना देकर एसडीएम भोपाल रवाना हो गईं।

- एसडीएम श्रीवास्तव ने कहा कि जब मैं देवास से आगे निकली तो पीड़ित परिवार रास्ते में तड़प रहा था। यह देख मुझसे रहा नहीं गया। इंसानियत के नाते जो मुझसे बन पड़ा मैंने किया। मेरी जगह काई और भी होता तो शायद यही करता। ऐसी स्थिति में घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए लोग एंबुलेंस का इंतजार करते रहते हैं। इसकी जगह यदि वे अपने साधन से उन्हें अस्पताल ले जाएं तो शायद किसी की जान बचा सकते हैं।

- भोपाल निवासी शशि एक कार्यक्रम में शामिल होने परिवार सहित इंदौर आ रहे थे। हादसे में शशिकुमार लोबो की मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी, पिता और दो बच्चे घायल हो गए। पिता की हालत गंभीर बताई जा रही है।