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10 की उम्र तक था अनपढ़, तानाशाह बन 24 साल तक किया देश पर राज


 इराक के प्रेसिडेंट सद्दाम हुसैन की गिनती दुनिया के क्रूर तानाशाहों में होती है। सद्दाम ने अपनी तानाशाही के बल पर लाखों लोगों को मौत के मुंह में धकेल दिया था। सद्दाम इराक का पांचवें प्रेसिडेंट थे। उन्होंने इराक पर लगभग 30 सालों तक राज किया। 30 दिसंबर 2006 को पूर्व इराकी तानाशाह सद्दाम हुसैन को फांसी पर चढ़ाया दिया गया था।10 साल की उम्र तक नहीं देखा था स्कूल का मुंह...

सद्दाम का पूरा नाम सद्दाम हुसैन अब्द अल-मजीद अल-टिकरी था। सद्दाम का जिस परिवार में जन्म हुआ था वो एक भूमिहीन सुन्नी परिवार था, जो पैगम्बर मोहम्मद के वंशज होने का दावा किया करते हैं। सद्दाम की मां का नाम तुलफा-अल-मुस्स्लत और पिता का नाम हुसैन आबिद-अल-मजीद था। सद्दाम ने अपने पिता को कभी नहीं देखा और न कभी उसके बारे में जान पाया। क्योंकि उसके जन्म के छह महीने पहले ही वे घर से गायब हो गए थे। बाद में उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई। सद्दाम को उनकी मां ने मामा के यहां भेज दिया था, जहां वे करीब 3 साल तक रहे। सद्दाम ने 10 साल की उम्र तक स्कूल का मुंह नहीं देखा था।
इस तरह बने प्रेसिडेंट
1957 में 20 साल की उम्र में वे स्कूल की पढ़ाई छोड़कर क्रांतिकारी अरब बाथ पार्टी में शामिल हो गए थे। साल 1958 में इराक में तख्तापलट हुआ और सद्दाम को चचेरे भाई की हत्या के आरोप में जेल में डाल दिया गया था, लेकिन 10 माह के बाद सबूतों के अभाव में उसे रिहा कर दिया गया। 1979 में सद्दाम हुसैन ने बीमारी के नाम पर जनरल अहमद हसन अल बक्र को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया और खुद देश के प्रेसिडेंट बन गए।
शिया मुस्लिमों के कत्लेआम का आरोप
सद्दाम पर इराक में शिया मुस्लिमों के कत्लेआम के आरोप लगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने हजारों की तादात में शिया मुस्लिमों का कत्लेआम करवाया। इसके लिए केमिकल वेपंस का भी यूज किया। अमेरिका ने इराक पर केमिकल वेपंस रखने का आरोप लगाते हुए साल 2003 में इराक पर हमला कर दिया था। 30 दिसंबर 2006 को उसे फांसी की सजा दे दी गई। उसकी अंतिम इच्छा थी कि उन्हें फांसी की बजाय शूट करके मारा जाए, ताकि वो सम्मान की मौत मरे, लेकिन उसकी इच्छा पूरी नहीं की गई। सद्दाम की फांसी के बाद उसको पैतृक गांव में दफन कर दिया गया।