इस लड़की की हड्डियां टूट गई, लेकिन जिद नहीं टूटी... लेटे-लेटे पूरी कर रही है MBA की तैयारी
यूं तो दुनिया में फौलादी दिल वालों की कमी नहीं है फिर भी ऐसे लोग कम ही होते हैं जो बुरी से बुरी किस्मत को भी घुटने टेकने पर मजबूर कर देते हैं। ऐसे ही लोगों में एक नाम है 24 साल की अंकिता नायडू का।
अंकिता को ओस्टोजेनेटिक इनपराफेक्टा बीमारी है जिसके चलते उसके शरीर की हड्डियां बहुत नाजुक हो चुकी है और पैन की कैप उतारने जैसे हल्के-फुल्के कामों से ही टूट जाती है। मगर उसकी जिद नहीं टूटती।
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा की रहने वालीं अंकिता नायडू जो ओस्टो जेनेटिक इन परफेक्ट नामक बीमारी से पीड़ित हैं।
ये बीमारी लाखों में से किसी एक को होती है। ये बीमारी ऐसी है पेन की कैप उतारते वक्त ही कई बाद अंकिता के हाथों की हड्डियां टूट जाती हैं।
रोज कहीं न कहीं की हड्डियां टूट जाती हैं। लेकिन उनकी जिद नहीं टूटती। इस बीमारी के कारण अंकिता की लम्बाई लगभग तीन फीट ही बढ़ पाई है और हड्डियां तो अनगिनत बार टूट चुकी हैं।
इस गंभीर बीमारी के बावजूद इसके अंकित बीसीए की पढ़ाई पूरी चुकी हैं और अब एमबीए की तैयारी कर रही हैं।
बहनों में अंकिता बड़ी हैं, वो बैठ भी नहीं सकतीं। अंकिता के पिता सत्यनारायण नायडु छिंदवाड़ा में ही प्राइवेट कम्पनी में नौकरी करते हैं और मां शिक्षक हैं।
वे बताते हैं कि अंकिता को ये बीमारी बचपन से ही। लेकिन वो मजबूत इरादों वाली लड़की है।
बारहवीं के बाद बीसीए करने की ठानी और उसे पूरा भी किया। कम्प्यूटर की पढ़ाई के लिए बिस्तर पर ही लेटकर कम्प्यूटर की बारीकियां सीखीं।
सभी परीक्षाएं भी लेटकर दी वो भी बिना किसी की मदद के।
बीसीए पूरा करने के बाद अंकिता एमबीए की तैयारी कर रही हैं। इसके लिए वह सेल्फ स्टडी के साथ इंटरनेट का भी सहारा लेती हैं।
सपना नौकरी करने का है। इसलिए बैंक की भी कई परीक्षांए दी हैं। अंकिता कहती हैं "नौकरी करने का मकसद इसलिए है क्योंकि अपने पैरों पर खड़ी होना चाहती हूं। और मम्मी-पापा को खुश देखना चाहता हूं।


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