देश में तेजी से बढ़ रहा है ये खतरनाक वायरस !
विश्वभर के अनेक देशों को अपनी गिरफ्त में लेने वाला ‘जीका वायरस’ दुनिया में आतंक का दूसरा नाम बन गया है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें अकेले सिर्फ ब्राजील में 15 लाख लोगों को जीका वायरस ने अपने शिकंजे मे जकड़ रखा है।
कहा जाता है कि ब्राजील में विश्वभर से लोग घूमने आते हैं, जिसकी वजह से वहां के लोगो द्वारा ये संक्रमण पूरी दुनिया में फैलने का डर है।
ब्राजील के साथ ही कोलंबिया,पैरागुए, फ्रेंच गयाना, वेनेजुएला, सूरीनाम और मेक्सिको, पुएर्तो, रीको में भी जीका वायरस का कहर है।
वहीं अर्जेंटीना, चिली, बोलिविया, पेरू, इक्वाडोर, कोस्टा रिका, एल साल्वाडोर, ग्वातेमाला, होंडूरास, पनामा, में भी इसका खतरा मंडरा रहा है।
एल सेल्वाडोर, कोलंबिया और इक्वाडोर जैसे देशों ने अपने देश की महिलाओं से कहा है कि वे साल 2018 तक गर्भवती होने से परहेज करें।
दुनिया के 15 देशों में फैले जीका वायरस का खतरा अब भारत पर भी मंडरा रहा है।
जीका वायरस से भले ही मौतें कम होती हैं, लेकिन इस वायरस का सबसे ज्यादा असर गर्भवती महिलाओं पर होता है, अगर कोई गर्भवती महिला जीका वायरस से संक्रमित है तो उसके बच्चे का जन्म आकार में छोटे और अविकसित दिमाग के साथ होता है।
भारत में सबसे पहले जीका वायरस का मामला गुजरात के अहमदाबाद में सामने आया था। भारत में जीका वायरस के सभी मामले अहमदाबाद के बापूनगर इलाके से आये थे।
वायरस एक्सपर्ट डॉक्टर नरेंद्र सैनी के अनुसार जीका वायरस डेंगू के एडिस मच्छर से फैलता है और ये मच्छर भारत में हर राज्य में मौजूद है खासकर राजधानी दिल्ली में डेंगू का एडिस मच्छर हर साल महामारी का कारण बनता है।
डॉक्टर सैनी ने कहा कि अभी यह वायरस देशवासियों के लिए नया वायरस है, इसलिए इसकी तुरंत ऐंटी-बॉडी भी नहीं बनेगी और इसका अटैक ज्यादा खतरनाक होगा।
वर्ष 1947 में पहली बार जीका वायरस की पहचान अफ्रीका और दक्षिण एशिया के कुछ देशों में हुई थी।
जिसके बाद ये कई बार अफ्रीका व साउथ ईस्ट एशिया के देशों के कुछ हिस्सों में फैला था। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि ये वायरस दक्षिण व उत्तर अमेरिकी महाद्वीपों के लगभग सभी क्षेत्रों में फैल सकता है।
अभी तक कैरेबियाई ,उत्तर व दक्षिणी अमेरिका के 21 देशों में ये वायरस फैल चुका है
जीका वायरस की उत्पत्ति एडीज, एजिप्टी और अन्य मच्छरों से होती है और ये चिकनगुनिया और डेंगू जैसी बीमारियों को भी फैलाती हैं।
इस वायरस के संक्रमण के आने के बाद बुखार,जोड़ो का दर्द ,शरीर पर लाल चकत्ते,थकान,सिर दर्द व आंखें लाल होने लगती हैं।
इससे प्रभावित बच्चे का जन्म आकार में छोटे और अविकसित दिमाग के साथ होता है। ये वायरस सिंड्रोम शरीर के तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है और इस वायरस के संक्रमण के बाद शरीर में लकवा मारने के भी आसार होते हैं।
अब तक जीका वायरस से निपटने के लिए कोई दवा मौजूद नहीं है। फिलहाल तो हर हाल में मच्छरों के काटने से बचना ही एकमात्र उपाय है।
जीका वायरस से ब्राजील में बीते साल मई में करीब डेढ़ लाख लोग प्रभावित हुए थे। अक्टूबर से लेकर अब तक ब्राजील में 3500 से ज्यादा छोटे सिर और अविकसित दिमाग वाले बच्चे पैदा हुए हैं।


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