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बेटे के इंतजार में हुई 7 बेटियां, अब नेशनल गेम्स खेलकर दिला रही हैं पहचान



 राजनांदगांव के एक गरीब परिवार ने बेटे और बेटियों में अंतर की सोच को बदल दिया है।दरअसल पिता को एक बेटे की चाहत थी, जिस कारण परिवार में एक के बाद एक लगातार सात बेटियों का जन्म हुआ। पिता को अपने फैसले पर उस वक्त शर्मिंदगी हुई जब उसकी बेटियों ने उसका ही नहीं पूरे गांव का नाम रोशन कर दिया।



अकरजन गांव के निषाद परिवार की बेटियां अब तक ५,5 नेशनल गेम्स का हिस्सा बन चुकी हैं। बेटियों ने पूरे गांव को खो-खो गांव के तौर में पहचान दिला दी है। अब गांव का घर परिवार ऐसी ही बेटियां अपने घर भी ऐसी बेटियां चाह रहा हैं।


- मजदूरी कर परिवार चलाने वाले विश्वनाथ निषाद की सात बेटियां है। दो बेटियों की शादी बीते साल ही हुई, लेकिन उसकी पांच बेटियां खो-खो की नेशनल प्लेयर बनकर हर साल होने वाले नेशनल स्कूल गेम्स की हिस्सा बन रही है।


 विश्वनाथ को अब बेटे नहीं होने का कोई मलाल नहीं है। वह अपनी बेटियों की काबिलियत देखकर खुश हैं। उनका मानना है कि बेटियां उन्हें समाज व पूरे क्षेत्र में सम्मान दिला रही है। विश्वनाथ की बेटियों की काबिलियत देख बेटियों को लेकर मन में आने वाली संकीर्ण सोच बदलकर व्यापक हो गई है।

- अरकजन से खैरागढ़ के खो-खो मैदान की दूरी करीब 4 किमी. है। ये बच्चियों सुबह व शाम दोनों समय पैदल यह दूरी तय कर प्रैक्टिस के लिए पहुंचती है। बारिश हो या कड़ाके की ठंड वे रेगुलर प्रैक्टिस करती हैं।



- ग्राम अकरजन को खो-खो गांव के नाम भी पहचाना जाने लगा है। इन पांच बहनों के अलावा गांव में खो-खो की 25 और भी नेशनल प्लेयर मौजूद है। हर साल नेशनल गेम्स में पांच बहनों के अलावा कुछ अन्य खिलाड़ी भी शिरकत कर रही है।