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मंदिर की जमीन हड़पने का विरोध करना पड़ा था भारी, मलखान सिंह को बनना पड़ा था डाकू


चंबल हमेशा से डाकुओं का गढ़ रहा है। इस बिहड़ से एक से बढ़कर एक डाकू पैदा हुए हैं। फूलनदेवी, मान सिंह जैसे डाकुओं का पैदा करने वाले इस बिहड़ में एक समय मलखान सिंह नाम के डाकू का भी बोलबाला था। मलखान सिंह से पूरा इलाका थर्राता था। हम आपके मलखान सिंह की पूरी कहानी बताते हैं।

मलखान सिंह पर हत्याओं और डकैती के हजारों मामले दर्ज थे। मलखान सिंह के डकैत और फिर डकैत से सामान्य आदमी बनने की कहानी दिलचस्प है। मलखान सिंह ने अपने गांव के सरपंच पर आरोप लगाया था कि उसने मंदिर की जमीन हड़प ली। मलखान ने जब इसका विरोध किया तो सरपंच ने उसे जेल भेजवा दिया और उसके दोस्त की हत्या करवा दी।

कहा जाता है कि वह सरपंच एक मंत्री का करीबी था और पुलिस उस तक नहीं पहुंच सकती थी। विरोध स्वरूप मलखान सिंह ने राइफल उठा ली और खुद को बागी घोषित कर दिया। मंदिर की 100 बीघा जमीन को मंदिर में मिलाने के लिए उन्होंने हथियार उठाए थे। उस दौरान वे पंच भी थे।

डाकू मलखान सिंह के गिरोह में करीब डेढ़ दर्जन लोग थे। गिरोह में शामिल लोग उनके गांव और आसपास के इलाके में रहने वाले लोग थे। इस गिरोह पर 32 पुलिस वालों समेत 185 हत्याएं करने का आरोप था। 1980 के दशक में मलखान सिंह ने अपने गिरोह के अन्य साथियों के साथ तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सामने आत्मसर्मपण कर दिया।

70 के दशक में चंबल घाटी के गांवों में आतंक का पर्याय बन चुके मलखान सिंह को पकडऩा पुलिस के लिए बहुत ही मुश्किल था। उससे भी ज्यादा उसे पकडक़र जेल में रखना मुश्किल था। मलखान ने करीब 1983 तक चंबल घाटी पर राज किया। आत्मसर्मपण के बाद उसे भूदान आन्दोलन के तहत मिली जमीन भी दी गई, ताकि वह सामान्य आदमी के रूप में अपना गुजर-बसर कर सके। मलखान सिंह ने पंचायत चुनाव लड़ा था और इसमें जीत भी हासिल की थी।

आत्मसमर्पण के चलते धीरे-धीरे मानसिंह की छवि लोगों के बीच में सेलिब्रिटी की हो गई, लेकिन अक्टूबर 2016 में नोटबंदी के दौरान जब वह अपने नोट बदलवाने ग्वालियर के महाराज बाड़ा स्थित एसबीआई की मुख्य शाखा पर पहुंचे तो भीड में से इस बार कोई मलखान के लिए नहीं हटा। यहां उसे घंटों रुपए बदलवाने के लिए शांति से लाइन में खड़े रहना पड़ा। कंधे पर लटकी बंदूक भी इस समय लोगों को डराने का काम नहीं कर सकी।

70-80 के दशक में मलखान और कई राज्यों की पुलिस के बीच टकराव होता रहता था और दोनों ओर से फायरिंग में लोग मारे भी गए थे। पुलिस के साथ आधार दर्जन मुठभेड़ें हुईं, लेकिन मलखान सिंह नहीं पकड़ा जा सका था। सालों तक मलखान चंबल के इलाकों में खौंफ की तस्वीर बना रहा। अपहरण, लूट, डकैती, हत्या और हत्या के प्रयास के सैकड़ों मामले मलखान सिंह के सिर पर रहे, लेकिन मलखान सिंह उस समय भी बीहड़ों में बेखौफ घूमता रहा।

मलखान सिंह के सिद्धांतों की कहानी फेमस है। एक बार उसके दुश्मन सरपंच की लडक़ी को गांव आते समय मलखान गिरोह के सदस्यों ने पकड़ लिया था तो उन्होंने पूरे गिरोह को फटकार लगाई थी और पैर छूने के साथ-साथ भेंट देकर लडक़ी को विदा किया था। गैंग के लोगों को भी इस बात की सख्त हिदायत दी हुई थी कि किसी भी औरत या बहू-बेटी से बदतमीजी ना हो और अगर कोई गैंग मेंबर इस तरह की किसी हरकत में शामिल होता था तो उसकी सजा सिर्फ मौत तय थी। ऐसे में मलखान को चंबल के गांव में हीरो की इमेज मिल चुकी थी। गांव-गांव में मलखान को दद्दा के नाम से पुकारा जाने लगा था।

अभिनेता संजीव कुमार मलखान सिंह के जीवन पर फिल्म बनाना चाहते थे, लेकिन वे फिल्म में घोड़े और शराब के दृश्य रखना चाहते थे, पर हकीकत इससे कहीं अलग थी। बीहड़ में 500-500 फीट तक के गड्ढे हैं। यहां घोड़े दौड़ नहीं सकते। बागी रहते मलखान खुद हफ्ते-हफ्ते भूखे रहे। ऐसे में घोड़े को चना-चारा कहां से खिलाते, इसलिए उन्होंने डायरेक्टर मुकेश चौकसे को मना किया और अभिनेता संजीव कुमार दृश्य नहीं शूट कर सके।