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यहां महिलाओं को नहीं थी कार चलाने की आजादी, ऐसे पूरा करती थीं शौक



सऊदी अरब ने महिलाओं के गाड़ी चलाने पर लगी रोक हटा दी है। देश के शाह मोहम्मद बिन सलमान के आदेश जारी करते ही अब महिलाओं को भी ड्राइविंग का हक होगा। अभी तक इस देश की महिलाओं को कार चलाने का शौक 'बंपर कार' चलाकर पूरा करना होता था।


इस फनी तरीके से कार चलाने को शौक पूरा करती थी महिलाएं...


नया फैसला अगले साल 24 जून से लागू होगा। सरकार ने एक कमेटी बनाई है, जो फैसले पर एक महीने में रिपोर्ट पेश करेगी। इसके जरिए फैसले को जारी करने की प्रक्रिया तय होगी। फैसला शरिया कानून के अंतर्गत ही लागू किया जाएगा।


महिलाओं की ड्राइविंग पर लगी पाबंदी के खिलाफ सऊदी अरब में 1990 से संघर्ष चल रहा था। 6 नवंबर 1990 को 47 सऊदी महिलाओं ने राजधानी रियाद में एक साथ गाड़ी चलाकर पहली बार इस नियम का विरोध किया। सभी महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया गया था। इसी के बाद देश में ‘वूमेन टू ड्राइव’ कैंपेन चल पड़ा। 2007 में 1,100 महिलाओं ने हस्ताक्षर कर किंग अब्दुल्ला को ये नियम हटाने का आवेदन दिया। इसकी अगुवाई महिला कार्यकर्ता वजीहा-अल-हुवैदर ने की। 2008 में वजीहा ने सऊदी अरब की सड़कों पर गाड़ी चलाते हुए एक वीडियो भी यू-ट्यूब पर अपलोड किया। ये वीडियो अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में रहा। 2013 में एक बार फिर वजीहा की अगुवाई में आंदोलन हुआ। हुवैदर को दस महीने जेल की सजा सुनाई गई।



सऊदी महिलाओं का संघर्ष जारी रहा और आखिर सफल भी हुआ। इसमें अहम भूमिका निभाने वाली महिला एक्टिविस्ट सहर नसीफ ने फैसले के बाद ट्वीट किया, ‘मुझे यकीन ही नहीं हो रहा। मैं खुशी से हंस रही हूं, कूद रही हूं, चिल्ला रही हूं। ये महान जीत है। अब मैं अपनी ड्रीम कार, काले-पीले रंग की मस्टंग खरीदूंगी।’ महिला एक्टिविस्ट लोउजैन अल हथलूल और ‘वूमेन टू ड्राइव’ कैंपेन से जुड़ी मनल अल शरीफ भी इस लंबी लड़ाई में शामिल रहीं। मनल ने भी फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए ट्वीट किया कि देश में महिलाओं की स्थिति अब पहले जैसी नहीं रहेगी।