अधूरे प्यार की कहानी कहता है ये देवी मंदिर, सुसाइड करने आया था राजा
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में ऊंचे पहाड़ पर स्थित माता बमलेश्वरी के मंदिर में नवरात्रि पर काफी भीड़ लग रही है। यहां दूर-दराज से लोग मां का आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं। यूं तो मां के प्रति अटूट आस्था और बमलेश्वरी मां के प्रताप से तो लोग भली-भांती परिचित हैं पर ये बहुत कम लोगों को ही पता होगा कि मंदिर का करीब 2 हजार साल पुराने इस मंदिर के इतिहास में एक नर्तकी और संगीतप्रेमी के अधूरे प्यार की कहानी है। यहां उज्जैन नगरी के राजा विक्रमादित्य सुसाइड करने जा रहे थे। तब देवी मां ने प्रकट होकर उन्हें रोका था।
करीब ढाई वर्ष पूर्व ये स्थान कामाख्या नगरी में था। यहां के राजा वीरसेन को काई पुत्र नहीं हुआ तो उन्होंने मां दुर्गा और शिव की उपासना की।
- मां दुर्गा और भगवान शिव के आशीर्वाद से उन्हें एक पुत्र की प्राप्ति हुई जिसका नाम मदनसेन रखा।
- राजा वीरसेन ने ची पहाड़ी पर मां बगलामुखी का मंदिर बनवा दिया।
मंदिर तो राजा वीरसेन ने बनवा दिया, लेकिन एक प्रेम कहानी के चलते मां यहां जागृत रूप में प्रतिष्ठित हो गईं।
- ऐसा कहते हैं कि यहां पूरे मन से मां की आराधना करने के बाद पुत्र रत्न की कामना करने वालों की इच्छा पूर्ण होती है।
ये कहानी एक नर्तकी और एक संगीत प्रेमी की थी जिसे संगीत का बहुत जबरदस्त ज्ञान था।
- वीरसेन के बाद माधवसेन और उनके बाद इनके पुत्र कामसेन ने कामाख्या नगरी की गद्दी संभाली। कामसेन राजा विक्रमादित्य के समकालीन थे। कामसेन के दरबार में एक नर्तकी कामकंदला थी
जिसपर एक संगीतज्ञ माधवनल मोहित हो गया। बाद में दोनों प्यार हो गया।
- इधर कामसेन का पुत्र मदनादित्य पिता के स्वभाव के विपरीत व्यभिचारी और अय्याश किस्म का था। उसकी नजर कामकंदला पर थी।
- जब मदनादित्य को पता चला कि कामकंदला माधवनल से प्यार करती है तो उसे बंदी बना लिया और माधवनल को पकड़ने के लिए सिपाही भेजे।
- इधर माधवनल भागते हुए उज्जैन नगरी जा पहुंचा और राजा विक्रमादित्य से अपने प्यार और उसके साथ हुई सारी घटना बता दी।
- विक्रमादित्य ने प्यार का साथ दिया और कामाख्या नगरी पर आक्रमण कर दिया। पूरा राज्य तहस-नहस हो गया और माधवनल के हाथों मदनादित्य मारा गया।
- राज्य में केवल ऊंची छोटी पहाड़ियां ही बची थीं जिन्हें डोंगर कहते हैं। ऐसे में डुंगराज्य नगरी की पृष्ठभूमि यहीं से तैयार हुई।
- इधर विक्रमादित्य ने दोनों के प्रेम की परीक्षा लेनी चाही और कामकंदला से कह दिया कि माधवनल युद्ध में मारा गया।
- यह सुन वो ये सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाई और एक तलाब में कूदकर जान दे दी। यह समाचार सुन माधवनल भी व्यथित हो गया और उसने भी प्राण त्याग दिए।
- इधर विक्रमादित्य को बड़ा अफसोस हुआ और उन्होंने मां बगलामुखी की पूजा की और मां से क्षमा मांगते हुए खुद प्राण त्यागने चल दिए।
- ऐसे में मां प्रकट हुईं और विक्रमादित्य को ये सब करने से रोक दिया। तब राजा विक्रमादित्य ने मां से वर मांगा कि इस प्रेमी जोड़े के लिए ही सही मां को जागृत रूप में यहां प्रतिष्ठित होना है।
- तभी से मां यहां जागृत रूप में हैं। यहीं पास में कामकंदला सरोवर जहां नर्तकी ने कूदकर जान दी थी।

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