इनकी एक पंच लाइन मचा देती है पूरे इंडस्ट्री में तहलका, 'ठंडा मतलब कोका कोला' तो सुना ही होगा
'ठंडा मतलब कोका कोला' जैसी जबरदस्त पंच लाइन लिखने वाले प्रसून जोशी फिल्म इंडस्ट्री का जाना माना नाम है। वो एक अच्छे कवि ही नहीं बल्कि एक अच्छे लेखक, स्क्रिप्ट राइटर ,गीतकार भी है।
और इस वक्त वो सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष भी। फिल्म इंडस्ट्री में आने से पहले प्रसून विज्ञापन के क्षेत्र से जुड़े हुए थे।
प्रसून जोशी का जन्म 16 सितम्बर 1968 को हुआ था। उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले के दन्या गाँव में जन्में प्रसून को बचपन से ही लिखने का बेहद शौक था। उनकी पहली किताब 'मैं और वो' 17 साल की उम्र में प्रकाशित हुई थी।
उनके पिता का नाम देवेन्द्र कुमार जोशी और माता का नाम सुषमा जोशी है। उनका बचपन व उनकी प्राथमिक शिक्षा टिहरी, गोपेश्वर, रुद्रप्रयाग, चमोली एवं नरेन्द्रनगर में हुई, जहां उन्होंने एमएससी और उसके बाद एमबीए की पढ़ाई की।
प्रतिभा के धनी प्रसून फिल्मों में गीत लिखने से पहले उन्होंने कोका कोला, मास्टर कार्ड, नेस्ले और हैप्पीडेंट जैसे कई ब्रैंड के लिए स्क्रिप्ट लिखी है। विज्ञापनों में लिखी गईं उनकी लाइन आज भी लोगों की जबान पर है।
उसके बाद उन्होंने फिल्मों की तरफ रूख किया। गीतकार के रूप में उन्होंने राजकुमार संतोषी की फिल्म 'लज्जा' से शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने 'हम तुम', 'रंग दे बसंती', 'तारे जमीन पर', 'ब्लैक', 'दिल्ली 6', 'लंदन ड्रीम्स', 'ब्रेक के बाद', 'तेरी मेरी कहानी' और 'सत्याग्रह' जैसी कई हिट फिल्मों में अपना योगदान दिया।
प्रसून को 2007 में फिल्म 'फना' के गाने 'चांद सिफारिश' के लिए और 2008 में 'तारे जमीन पर' के गाने 'मां' के लिए फिल्मफेयर में सर्वश्रेष्ठ गीतकार के अवॉर्ड से नवाजा गया।
उन्होंने महान एथलीट मिल्खा सिंह की जिंदगी पर बनी फिल्म 'भाग मिल्खा भाग' की स्क्रिप्ट लिखी थी जो बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुई।
उन्हें 400 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं।
यही नहीं उन्हें नेशनल अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है। ये अवॉर्ड उन्हें 2007 में 'तारे जमीन पर' के गाने 'मां' और 2013 में फिल्म 'चिटगांव' के लिए मिला था।
प्रसून ने छोटी सी उम्र में लिखना शुरू कर दिया था। उनकी पहली किताब 'मैं और वो' 17 साल की उम्र में प्रकाशित हुई थी। वो फिलहाल मैक्केन एरिक्सन वर्ल्ड ग्रुप के सीईओ और चेयरमैन हैं।
प्रसून को 2015 में कला, साहित्य और विज्ञापन के क्षेत्र के प्रति उनके योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा पद्म श्री अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था।10 वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम से जुड़ी एक संस्था ने उन्हें 2006 में 'यंग ग्लोबल लीडर' से सम्मानित किया था।
विज्ञापन क्षेत्र से होने के नाते प्रसून का ये मानना है कि 'हवन करेंगे', 'मस्ती की पाठशाला' और 'गेंदा फूल' जैसे गीत पसंद आते हैं. उनका कहना है कि हर कोई बिना समझौता किए इन पर थिरक सकता है। उन्हें ऐसे गीत पसंद है जो अटपटे हो। ऐसे गीत और उसकी धुन सुनकर उनका खून खौल उठता है। इस तरह के गीत प्रसून को काफी भाते हैं।


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