बाहुबली के लिए प्रभास के बाद जानी जाएंगी सिर्फ शिवगामी देवी, इनका वचन ही है शासन
बाहुबली में राजमाता शिवगामी का किरदार निभाकर दुनियाभर में फेमस हो चुकी राम्या कृष्ण ने अबतक 200 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है। लेकिन बाहुबली के किरदार ने मानो उन्हें दुनियाभर में फेमस बना दिया।
बॉलीवुड की कई फिल्मों में काम कर चुकी शिवगामी ने करियर की शुरूआत काफी छोटे से उम्र से शुरू कर दी थी। आईए जानें उनकी फिल्मी सफर के कुछ अनछुए पल:
राम्या कृष्णन का जन्म 15 सितंबर 1970 को चेन्नई में हुआ था। 13 साल की उम्र से ही राम्या फिल्म से जुड़ने का मौका मिला। उन्होंने मलयालम फिल्म 'नेराम पुलरमबोल' से डेब्यू किया था।
राम्या को तमिल फिल्म पाडायप्पा के लिए फिल्मफेयर बेस्ट ऐक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला था. इसके अलावा वह साउथ के रियलिटी शो जोड़ी नंबर वन के पहले सीजन की जज रही हैं।
साउथ इंडस्ट्री से शुरूआत करने वाली राम्या का सबकुछ सही चल रहा था लेकिन उन्हें बॉलीवुड से प्यार था। राम्या को पहली हिंदी फिल्म 1988 में मिली। ये फिल्म थी 'दयावान' जिसमें उनके साथ विनोद खन्ना और माधुरी दीक्षित थीं। लेकिन इस फिल्म में उनका किरदार काफी छोटा था।
एक डांसर की भूमिका ने उन्हें खास पहचान नहीं मिली। बता दें कि करियर के शुरूआती दौर से लेकर अब तक राम्या के एक्टिंग ,स्टाईल व पहनावे से लेकर उनके ग्लैमरस अंदाज में काफी बदलाव आया है। उनकी एक्टिंग को में वो जादू है जो अच्छे अच्छे को सोचने पर मजबूर कर दे।
बॉलीवुड में काम करने के दौरान राम्या अपने बोल्ड सीन्स की वजह से काफी सुर्खियों में रही। फिल्म 'परंपरा' में तो उन्होंने उम्र में 24 साल बड़े एक्टर विनोद खन्ना के साथ एक लिपलॉक किया जो खूब चर्चित रहा।
इतने बड़े फिल्म में काम करने के बाद राम्या करीबन तान चार साल तक कोई भी फिल्म नहीं मिली। इसके बाद वापस से उन्होंने टॉलीवुड में वापसी कर ली। उन्होंने बॉलीवुड में शाहरुख,विनोद खन्ना, अमिताभ बच्चन और जैकी श्रॉफ जैसे बड़े स्टार्स के साथ काम किया है।
उन्होंने बॉलीवुड में शाहरुख,विनोद खन्ना, अमिताभ बच्चन और जैकी श्रॉफ जैसे बड़े स्टार्स के साथ काम किया है।
पर्सनल लाइफ की बात करें तो उन्होंने 12 जून, 2003 में तेलुगु फिल्मों के फिल्ममेकर वामसी कृष्णा से शादी की थी। राम्या ने 13 फरवरी 2004 को बेटे ऋत्विक को जन्म दिया था।
बाहुबली में काम करने को लेकर राम्या ने एक इंटरव्यू में बाताया कि फिल्म की कहानी सुनने के बाद मुझे हर सीन्स और शार्ट में दिमाग में आ चुके थे।
दरअसल डायरेक्टर का विजन क्लियर हो तो आर्टिस्ट्स के लिए किरदार में ढलना आसान होता है। उन्होंने बताया कि जब राजमौली ने मुझे फिल्म की कहानी सुनाई थी, मेरे रौंगटे खड़े हो गए थे। मैं लगातार 2 घंटों तक मैं सुनती रही।


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