कंगाल हो चुका था अमिताभ बच्चन का ये 'दोस्त', नहीं बचे थे खाने तक के पैसे
एक वक्त ऐसा भी आया था, जब प्यारेलाल को काम मिलना बंद हो गया और वे करीब-करीब फुटपाथ पर आ गए।
अमिताभ बच्चन का फ़िल्मी करियर जैसे उतार-चढ़ाव से गुजरा है। उससे भी ज्यादा चौंकाने वाली कहानी है फिल्मों में उनके दोस्त का रोल करने वाले राम सेठी की, जिन्हें ज्यादातर लोग प्यारेलाल के नाम से भी जानते हैं।
उन्हें यह नाम फिल्म 'मुकद्दर का सिकंदर' (1978) में अमिताभ के दोस्त प्यारेलाला आवारा का रोल करने के बाद ही मिला था। एक वक्त ऐसा भी आया था, जब प्यारेलाल को काम मिलना बंद हो गया और वे करीब-करीब फुटपाथ पर आ गए। इस बात का खुलासा उन्होंने एक इंटरव्यू में किया था। क्या कहा था राम सेठी ने...
- 2012 में एक अंग्रेजी वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में राम सेठी ने कहा था, "1993 के बाद मैं लगभग टूटने की कगार पर पहुंच गया था। 53 साल की उम्र में मुझे फैमिली को सपोर्ट करना था और मेरे पास कोई काम नहीं था। उस समय मैंने वह दौर भी देखा, जब मेरे पास खाने के पैसे तक नहीं थे। मैं पूरी तरह फुटपाथ पर आ गया था। प्रकाशजी (प्रकाश मेहरा) ने मुझे उस वक्त बहुत सपोर्ट किया।"
- "किसी तरह मैंने वह दौर निकाला। करीब एक साल बाद 1994 में कुछ टीवी डायरेक्टर्स ने मुझे अप्रोच किया और एक्टिंग का मौक़ा दिया। तब मुझे 2000 रुपए एक दिन के मिलते थे। करीब चार साल तक मैंने टीवी पर काम किया।"
दूरदर्शन को रिश्वत नहीं मिली तो टेलीकास्ट नहीं होने दिए शो
- बकौल राम, "1996 में मैं खुद का प्रोडक्शन हाउस शुरू करना चाहता था। कुछ दोस्तों ने मेरी मदद की। उनके पास एक फाइनेंसस और एक डायरेक्टर भी था। मैंने प्रोडक्शन हाउस शुरू होते ही उनकी मदद की। हमने कुछ टीवी सीरीज बनाईं, जिन्हें दूरदर्शन पर टेलीकास्ट करना चाहते थे। चूंकि फाइनेंसर अमेरिकन था और उसने दूरदर्शन को रिश्वत देने से इनकार कर दिया। इस वजह से हमारे सीरियल्स टेलीकास्ट नहीं हो सके।"
- "2000 में मुझे पारिवारिक परेशानियों की वजह से दिल्ली जाना पड़ा और जब दो साल बाद मैं लौटा तो इंडस्ट्री पूरी तरह बदल चुकी थी। कई नए चैनल्स खुल गए थे। मैं कम्फ़र्टेबल नहीं था। इस वजह से डिप्रेशन में चला गया और खुद को गुमशुदा और नर्वस महसूस करने लगा। मैं दोस्तों से मिलता था तो उनके नाम भूल जाया करता था। जब प्रकाशजी से मिला तो उन्होंने मदद की। मेरे पास कुछ जमीन भी थी, जो उन दिनों बिक चुकी थी।"
- राम सेठी की मुताबिक, 2003 में प्रकाश मेहरा ने उनके और अमिताभ बच्चन के साथ एक फिल्म प्लान की थी। स्क्रिप्ट फाइनल हो चुकी थी। लेकिन बदकिस्मती से मेहरा को हार्ट अटैक आया और फिल्म नहीं बन सकी। राम की मानें तो 2012 में एक ऑटोमोबाइल कंपनी के स्कूटर के ऐड के बाद लोगों ने उन्हें नोटिस करना शुरू किया और अब उन्हें अच्छे ऑफर्स मिल रहे हैं।
1962 में दिल्ली से मुंबई आए
- राम सेठी के मुताबिक, वे 1962 में फिल्मों में किस्मत आजमाने के लिए दिल्ली से मुंबई आए तो उनके पिता ने उनसे कहा कि वे 6 महीने के लिए सिर्फ 150 रुपए ही उन्हें दे सकते हैं। हालांकि, मुंबई में उन्हें काम नहीं मिला और वे वापस लौट गए।
- 1964 में वे फिर मुंबई गए और उनकी मुलाकात फिल्ममेकर रवि टंडन से हुई। रवि उस वक्त कोई फिल्म नहीं बना रहे थे, लेकिन उन्होंने राम को कहा कि वे उन्हें अपनी मूवी में लेंगे। फाइनली, राम फिर दिल्ली लौट गए।
- राम के मुताबिक, 1968 तक उन्हें फिल्मों में काम नहीं मिला। उन्होंने बतौर एसोसिएट डायरेक्टर चिल्ड्रेन फिल्म सोसाइटी ज्वॉइन की और इंडो-रशियन फिल्म 'ब्लैक माउंटेन में डायरेक्टर एम. एस. सत्यु को असिस्ट किया।
- उस वक्त राम के पास मुंबई में घर नहीं था। इसलिए वे शबाना आजमी के कजिन ईशान आर्य (जाने-माने कैमरामैन) के साथ रहते थे।
प्रकाश मेहरा ने बदली जिंदगी
- राम सेठी के मुताबिक, एक दोस्त ने उनकी मुलाकात प्रकाश मेहरा से कराई। उस वक्त वे हिंदुस्तानी थिएटर में प्ले किया करते थे। मेहरा ने राम का एक प्ले देखा था। जब राम मेहरा से पहली बार मिले तो उन्होंने कहा कि वे उनसे डायरेक्शन सीखना चाहते हैं। मेहरा तुरंत मान गए।
- राम के मुताबिक, मेहरा के साथ उनकी जर्नी फिल्म 'एक कुंवारा एक कुंवारी' (1971) के साथ शुरू हुई, जिसे वे राकेश रोशन, प्राण और लीना चंदावरकर के साथ बना रहे थे। इस फिल्म में उन्हें क्लैपर ब्वॉय बनाया गया। फिल्म के कुछ डायलॉग्स भी राम ने लिखे थे।
- इस फिल्म के दौरान एक दिन मेहरा ने राम से पूछा कि क्या वे एक्टिंग करना भी पसंद करेंगे और वे तैयार हो गए। राम के मुताबिक, कोई भी नहीं जानता कि इस फिल्म में उनका डबल रोल था। इसके बाद मेहरा उन्हें हर फिल्म में लेने लगे।
- राम कहते हैं कि बाद में उन्हें अमिताभ बच्चन स्टारर 'जंजीर' में कांस्टेबल का रोल किया, जिसे प्रकाश मेहरा ने ही डायरेक्ट किया था।
ऐसे बन गए 'प्यारेलाल'
- राम सेठी के मुताबिक, फिल्म 'मुकद्दर का सिकंदर' ने उनकी जिंदगी बदल दी। इस फिल्म के लिए पहले असरानी का नाम तय हुआ था। जब शूटिंग स्टार्ट हुई, तब असरानी किसी अन्य लोकेशन पर कोई दूसरी फिल्म कर रहे थे और बारिश के कारण वे 'मुकद्दर का सिकंदर' के सेट पर नहीं पहुंच सके।
- दो दिन तक प्रकाश मेहरा ने असरानी का इंतजार किया। इसके बाद मेहरा को डर लगने लगा। क्योंकि अमिताभ बच्चन, विनोद खन्ना और राखी से उन्होंने डेट ले रखी थी। इसलिए किसी तरह भी शूटिंग नहीं टाली जा सकती थी।
- मेहरा ने राम सेठी से प्यारेलाल का रोल करने की रिक्वेस्ट की। इस तरह अचानक इतना बड़े रोल का ऑफर सुनकर राम चौंक गए। उन्हें असरानी के कपड़े और जूते लूज होते थे, लेकिन किसी तरह मैनेज करके उन्होंने शूटिंग की।
- फिल्म बड़ी होने की वजह से सभी का नाम क्रेडिट में दे पाना संभव नहीं था। इसलिए राम का नाम भी वहां से छूट गया और वे प्यारेलाल के नाम से ही फेमस हो गए।
- बाद में उन्होंने अमिताभ के साथ 'याराना' और 'नमक हलाल' जैसी कई अन्य फिल्मों में भी काम किया।


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