दिन के 23 घंटे बाथरूम में बिताते थे संजय, हर ड्रग ट्राई किया
संजय दत्त ने बताया कि एक वक्त ऐसा था, जब लोग चरसी कहकर मेरा मजाक बनाया करते थे।
बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त आंत्रप्रेन्योर्स ऑर्गेनाइजेशन जयपुर चैप्टर के 10 इयर्स और ग्लोबल 30 ईयर्स के सेलिब्रेशन में शामिल हुए। सेशन में संजय दत्त के साथ उनकी पत्नी मान्यता भी मौजूद रहीं।
इस दौरान उन्होंने अपने जिंदगी से जुड़े अनछुए पहलुओं को शेयर किया। जिसमें उन्होंने अपने उस दौर के बारे में भी खुलासा किया, जब वे ड्रग्स की बुरी आदत के शिकार थे और उनपर टाडा जैसे मामलों में संगीन आरोप थे। बताया- ऐसा कोई ड्रग नहीं जो ट्राई नहीं किया
संजय दत्त के मुताबिक, एक बार ड्रग्स की लत पड़ने पर उससे निकलना दुनिया का सबसे मुश्किल काम है। मैं दिन के 23 घंटे चूहे की तरह बाथरूम में ही पड़ा रहता था, अब लगता है जिंदगी और करियर का सबसे खूबसूरत वक्त मैंने ड्रग्स पर बर्बाद कर दिया।
ऐसा कोई ड्रग नहीं जो मैंने ट्राई न किया हो। अमेरिका के री-हैब सेंटर में जब डॉक्टर ने ड्रग्स लिस्ट दी तो मैंने सब पर टिक किया था, लेकिन ट्रीटमेंट के बाद लगा जब मेरे पास मेरा परिवार है तो ड्रग्स पर हाई होने की क्या जरूरत है। दुनिया की सबसे बड़ी खुशी तो आपके अपने ही देते हैं ना।
हाॅलीवुड स्टार को देखकर बनाई बॉडी
होटल रामबाग पैलेस में हुए सेशन में ईओ के प्रेजिडेंट अभिषेक रानीवाला से बातचीत के दौरान संजय दत्त ने बताया कि लोग चरसी कहकर मेरा मजाक बनाया करते थे, मैं उस नोशन को तोड़कर उन्हें गलत ठहराना चाहता था
और इसीलिए फिटनेस को धर्म की तरह मान लिया। रोजाना जिम जाने लगा। मुझे सिल्वेस्टर स्टेलॉन बहुत पसंद हैं इसलिए उन्हें देख अपनी बॉडी बनाने लगा।
पिता अखबार से मुंह छुपा लेते थे
- संजय ने बताया, मेरे पेरेंट्स के लिए देश के हित से कीमती और कुछ नहीं था, लेकिन जब पापा ने अपने ही बेटे को टाडा चार्ज में हथकड़ियां लगाते हुए देखा तो वो अपने आंसू रोक नहीं पाए।
वे इतने शर्मिंदा थे कि कई बार अखबार से मुंह छिपाकर गुजरते कि लोग न देख पाएं और बेटे का मजाक न उड़े, लेकिन उन्हें आखिरी वक्त तक यकीन था कि उनका बेटा टेररिस्ट नहीं हो सकता। बेशक गलती की, लेकिन अपने देश के खिलाफ जाने की मंशा के साथ नहीं।
- वहीं मान्यता ने बताया, संजय ने खुद आगे बढ़कर सरेंडर किया। यही नहीं साइन की हुई सारी फिल्म्स भी पूरी कीं ताकि, डायरेक्टर्स को नुकसान न झेलना पड़े।
अरेस्ट होने के बाद टाडा के बारे में पूरा पढ़ा
संजय दत्त को जब ज्वांइट कमिश्नर ने अरेस्ट किया तब उन्हें पहली बार पता चला कि टाडा क्या है। उन्होंने बताया कि अरेस्ट होने के बाद मैंने टाडा के बारे में पूरा पढ़ा, इसके चार्जेज क्या हैं?
मेरा क्राइम क्या है? हर इंसान को अपने काम से जुड़े लॉ की पूरी जानकारी रखनी चाहिए। चाहे आप आंत्रप्रेन्योर हो, एंटरटेनमेंट में या इनकम टैक्स में, कॉर्पोरेट लॉ की जानकारी रखें।
मेरी गलती थी लॉ के बारे कुछ न जानने की। जिंदगी के 25 साल मैंने बर्बाद किए, लेकिन इससे मैं कमजोर नहीं पड़ा। अपना केस खुद लड़ा अौर मैं आंख में देखकर बोलता था कि यह मुझे नहीं हरा सकता।
जेल में रहते हुए बनाया करते थे पेपरबैग्स
जेल में रहते हुए संजय पेपरबैग्स बनाया करते थे, जिसके लिए उन्हें एक पेपर बैग पर 10 पैसे मिलते थे।
साथ ही इन्होंने गीता, रामायण, पुराण और कई वेद भी पढ़े और रेडियो की शुरुआत की जिसपर वे नॉन वायलेंस पर बात करते और लाइट म्यूजिक प्ले करते।
- संजय ने बताया, स्टार किड होना मेरे लिए और भी खतरनाक था, बाकी कैदियों के साथ न रख अकेले जेल में रखते।
अकेले रहना और भी ज्यादा पेनफुल था। असल में हम फ्रीडम को ग्रांटेड लेते हैं। एक बार आजादी हाथ से फिसली तो पैसा और गोल्ड आपको वो लौटा नहीं सकता।


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