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क्या आप जानते है कैसे हुई थी कृष्ण के माता-पिता की मृत्यु...


हिंदू धर्म में विष्णु के अंतिम अवतार श्री कृष्ण के साथ कई रोचक प्रश्न जुड़े हुए हैं। दरअसल, श्री कष्ण हिंदू धर्म के संपूर्ण अवतार कहे जाते हैं।

उन्हें एक बेहतरीन राजनेता और 64 कलाओं का स्वामी भी माना गया है। यही नहीं कुरुक्षेत्र के युद्ध से पहले दिया हुआ गीता ज्ञान आज भी लोगों का मार्ग दर्शन करता है।

इसी तरह कृष्ण के बारे में बहुत सी बातें लिखी गयी हैं, लेकिन उनको जन्म देने वाले माता पिता देवकी और वासुदेव और उनका पालन करने वाले माता पिता योशोदा और नंदलाल कहा थे और उनकी मृत्यु कैसे हुई, आज हम इन्हीं रहस्यों से पर्दा उठाएंगे।

ऐसा कहा जाता है कि आखरी बार कृष्ण अपने माता-पिता से कुरुसेत्र में मिले थे। इसी जगह परशुराम ने क्षत्रियों को हराने के बाद तपस्या की थी।

भगवद गीता के अनुसार, कुरुक्षेत्र जाते समय कृष्ण अपने माता-पिता यशोदा और नंदलाल से मुलाकात करते थे हुए गए थे। भगवद गीता में ऐसा कहा गया है कि कृष्ण उनसे मिल कर बहुत भावुक हो गये थे और उनके माता पिता बहुत खुश हुए थे।

कहा जाता है कि जब भगवान कृष्ण अपनी मां यशोदा से मिलने गए तो वे अपनी आखरी सास ले रही थी। और उन्हें इस बात का बहुत दुःख था कि कृष्ण की 16,000 पत्नियां होने के बावजूद वे एक भी विवाह में शामिल नहीं हो पायी।

अपनी माँ का दुःख उनसे देखा नहीं गया और उन्हों ने अपनी माँ से वादा किया कि अगले जन्म में वे उनके सारे विवाह में शामिल होंगी। इस तरह अगले जन्म में यशोदा वकुलादेवी के रूप में जन्मी और कृष्ण वेंकटेश्वरा और इस तरह वकुलादेवी उनके सारे विवाह में शामिल हुई।

हम सभी जानते हैं कि कृष्ण की मृत्यु पैरों में तीर लगने के कारण हुई थी। ऐसा कहा जाता है कि जब यह खबर वृन्दावन पहुंची तो उनके पिता वासुदेव को सदमा लगा और उनकी मृत्यु हो गयी।

वासुदेव और कृष्ण की मृत्यु के बारे में सुन कर देवकी ने खुद को चिता जला लिया, और वे सती होगयी थी। लेकिन यह उन्होंने अपने पति और बेटे की मृत्यु खबर सुन कर किया था।

कृष्ण के पिता नंदलाल की मौत के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी किसी को नहीं है। लेकिन कहा जाता है कि नंदलाल शिव के भक्त थे और इसी कारण उन्हें उनके भक्त गना ले गए थे। जिसके बाद उनको मोक्ष की प्राप्ति हुई थी।

कृष्ण एक विश्वास पात्र दोस्त, गुरु और विश्वसनीय सलाहकार थे। साथ ही कृष्ण का पांडवों से सीधा रिश्ता था। कुंती पांडवों की माँ और वासुदेव की बहन थी जो उनके असली पिता थे।

कृष्ण देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र थे और उनसे पहले जन्मे उनके भाई बहन को उनके मामा कंस ने मार दिया था। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि कृष्ण ने जन्म लेने के बाद उन्होंने अपने सारे भाई बहनों को पुनर्जीवित कर दिया था।

अपने भाई बहनों को ही नहीं कृष्ण ने अपने गुरु सांदीपनी के बेटे को जीवित किया था। कृष्ण ने इस तरह अपने गुरु को गुरुदक्षिणा दी थी।

कृष्ण को विभिन्न शाप लगे हुए थे जिनके फल स्वरूप ऐसा कहा जाता है कि ऋषि दुर्वास ने उन्हें शाप दिया था कि उनके पैर कमजोर और असुरक्षित रहेंगे।

इसके अलावा कृष्ण को गांधारी ने भी शाप दिया था, उन्हों ने कहा था जैसे उनके पूरे कौरव वंश का सर्वनाश हुआ है वैसे ही कृष्ण के भी पूरे वंश का सर्वनाश हो जाएगा।