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जब रेप सीन के बाद सहम गईं थीं माधुरी, विलेन से बोली, 'मुझे हाथ मत लगाना'


फिल्म के एक रेप सीन की वजह से सहम गईं थीं माधुरी दीक्षित।

बात 80 के दशक की है। ये वो दौर था जब माधुरी दीक्षित इंडस्ट्री में आईं ही थीं। उन्होंने कुछ ही फिल्मों में काम किया था। इसी दौरान उन्हें एक फिल्म ऑफर हुई थी 'प्रेम प्रतिज्ञा'। फिल्म में उनके हीरो मिथुन चक्रवर्ती थे। इस फिल्म में विलेन का किरदार रंजीत ने निभाया था। बता दें कि फिल्म के एक रेप सीन की वजह से माधुरी इतनी ज्यादा सहम गईं थीं कि सीन के बाद उन्होंने विलेन रंजीत से कह दिया था मुझे हाथ मत लगाओ। हालांकि, फिल्म में रेप सीन जरूरी था और माधुरी इसके लिए तैयार भी थी। सीन शूट होने से पहले माधुरी के मन थी उथल-पुथल...


80 के दौर में रंजीत की गिनती फिल्मों के पॉपुलर विलेन में की जाती थी। फिल्म 'प्रेम प्रतिज्ञा' की कहानी को देखते हुए उसमें एक रेप सीन भी डाला गया था। इस फिल्म का रेप सीन माधुरी दीक्षित और एक्टर रंजीत पर फिल्माया जाना था। सीन को शूट करने की सारी तैयारियां कर ली गईं थी। माधुरी भी इस सीन के लिए तैयार थीं। लेकिन माधुरी के मन में जमकर उथल-पुथल चल रही थी। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि फिल्म 'प्रेम प्रतिज्ञा' के रेप सीन को लेकर उनके मन में कई सवाल उठे थे। सीन शूट होने से पहले वे सोच रही थी कि शूट के दौरान क्या होगा, वे कैसे करेंगी।

'प्रेम प्रतिज्ञा' में रेप सीन को फिल्म का जरूरी हिस्सा माना गया था। इस बात को ध्यान में रखकर माधुरी भी इस सीन के लिए तैयार हो गईं थीं। जानकारों का कहना है कि माधुरी मन ही मन रंजीत की छवि को लेकर डरी हुईं थीं लेकिन जैसे तैसे इस को सीन शूट कर लिया गया था। जहां शॉट से फिल्म की पूरी टीम खुश थी, वहीं रंजीत और फिल्म के डायरेक्टर बापू को लगा कि शायद माधुरी इस सीन को करने के बाद सहज महसूस नहीं कर रही हैं।

सीन शूट होने के बाद रंजीत और बापू ने माधुरी से पूछा कि क्या वो ठीक हैं, उन्हें रेप सीन करने में कोई दिक्कत तो नहीं हुई, माधुरी ने कहा कि उन्हें बुरा नहीं लगा और ना ही रंजीत का टच महसूस हुआ लेकिन अंदर से वो बेहद डरी हुईं थीं। खुद रंजीत ने भी बताया था कि इस सीन को लेकर माधुरी काफी डरी हुईं थीं। शूटिंग से जुड़े किस्सों में सुनने को आता है कि माधुरी इस कदर डर गई थी कि उन्होंने रंजीत को उन्हें छूने तक से मना कर दिया था।

फिल्म 'प्रेम प्रतिज्ञा' से पहले माधुरी 'अबोध' (1984), 'आवारा बाप' (1985), 'स्वाति' (1986), 'मानव हत्या' (1986), 'हिफाजत' (1987), 'उत्तर दक्षिण' (1987), 'मोह'रे (1988), 'खतरों के खिलाड़ी' (1988), 'दयावान' (1988), 'तेजाब' (1988), 'वर्दी' (1989), 'रामलखन' (1989) फिल्मों में नजर आ चुकी थीं।