दरगाह में अजगर के पेट से निकले दो जिंदा खरगोश, ये कहानी आई सामने

बुरहानपुर में बोहरा समाज के तीर्थ दरगाहे हकीमी में शनिवार को एक अजगर एक के बाद एक दो खरगोश निगल गया। जियारत के लिए आए लोगों ने तत्काल मस्जिद कमेटी के सदस्यों को इसकी सूचना दी। सांप पकड़ने वाले कल्लू उस्ताद ने डंडे से अजगर के पेट से दोनों खरगोश जीवित निकाल लिए. हालांकि आधे घंटे बाद दोनों ने दम तोड़ दिया।बाद में अजगर को जंगल में छोड़ दिया गया।
- बोहरा समाज के प्रमुख तीर्थ दरगाहे हकीमी के एक हिस्से में कमेटी ने एक कबूतरखाना बना रखा है। इसमें कबूतरों के साथ कुछ खरगोश भी है। शनिवार सुबह जब एक कर्मचारी कबूतर खाने के सामने से गुजरी तो वहां का नजारा देख उसके होश उड़ गए। वहां खरगोश के बाड़े में एक बड़ा अजगर डेरा डाले बैठा था और उसके डर से दो खरगोश एक कोने में सिमटे हुए थे।
- अजगर को देख घबराई कर्मचारी ने तत्काल दरगाह कमेटी के पदाधिकारियों को इसकी सूचना दी।जब तक लोग वहां पहुंचे तब तक अजगर दोनों खरगोशों को निगल चुका था और आराम फरमा रहा था। लोगों को डर था कि वह बाड़े से निकलकर रेसिडेंशियल ब्लॉक की तरफ ना बढ़ जाए।
-कमेटी के लोगों ने सांप पकड़ने के एक्सपर्ट कल्लू उस्ताद को बुलवाया।कल्लू उस्ताद ने बताया कि अजगर करीब 12 फीट लंबा था और खरगोश निगलकर सुस्ता रहा था। दोनों खरगोश उसके पेट और गर्दन के बीच के हिस्से में थे। अनुभवी कल्लू उस्ताद ने पेट के नीचे की तरफ डंडे से इस तरह वार किया जिससे खरगोश आगे की तरफ खिसके। इससे अजगर बैचेन हो गया, दूसरे वार के बाद उसने घबराकर पलटना शुरू किया और फिर उसके पेट में से दोनों खरगोश ज़िंदा बाहर आ गए।
- बाहर आने के करीब आधे घंटे बाद दोनों ने दम तोड़ दिया। कल्लू उस्ताद ने बताया कि अपने शिकार को निगलने के बाद अजगर पेड़ के चारों तरफ लिपटता है इसके बाद शिकार की मृत्यु हो जाती है। ऐसा करने के पहले उसके पेट में शिकार ज़िंदा रहता है। यदि इन दोनों को थोड़ी देर पहले निकाल लिया जाता तो शायद दोनों ज़िंदा बच जाते। बाद में कल्लू उस्ताद ने अपने एक साथी की मदद से अजगर को जंगल में छोड़ दिया।

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