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CM के कहने पर इस लड़की का हुआ था एडमिशन, अब राहुल गांधी की हैं खास



पिछले कुछ माह से कांग्रेस की सोशल मीडिया की रणनीति बदली हुई और आक्रामक हो गई है। इसका काम दिव्य स्पंदन देख रही हैं। कुछ समय पहले ही राहुल गांधी ने उन्हें इसके लिए चुना है। पिछली बार के आम चुनाव में वे सांसद रह चुकी हैं, लेकिन 2014 के चुनाव में वे मांड्या से 5500 वोट से हारीं।



2004 में पहली बार वे तमिल फिल्म इंडस्ट्री में आईं। उन्होंने रम्या के नाम से ‘कुथ्थू’ फिल्म में काम किया। इसके बाद 2006 में ‘तनानाम तनानाम’ फिल्म के लिए उन्हें श्रेष्ठ अदाकारा का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। इसके बाद लगातार फिल्में आती रहीं। मां की कांग्रेस से नजदीकी के कारण 2012 में वे कांग्रेस में शामिल हो गईं।



ब्रांडी, चैम्प और टिनी नाम के तीन श्वानों के साथ रहने वाली दिव्य स्पंदन की मां सिंगल पैरेंट रही हैं। ऊटी के बोर्डिंग स्कूल में पढ़ी। जब तक दिव्य स्पंदन आठवीं में थीं, तब तक सौतेले पिता के साथ उनके घर में रहीं। उन्हीं ने दिव्य स्पंदन का पढ़ाई का खर्च उठाया। मां कांग्रेस के अलावा बेंगलुरू पुलिस कमिश्नर के ऑफिस में आत्महत्या हेल्पलाइन में स्टाफर भी रहीं। कॉलेज में एडमिशन कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा के कहने पर हुआ। कृष्णा दिव्य स्पंदन के पिता के करीबी मित्र हैं। ग्रेजुएशन पूरा होते होते फिल्मों के ऑफर आने लगे और वे फिल्मों में आ गईं।



अपनी किसी भी प्रतिक्रिया में वे सत्तापक्ष के प्रमुख लोगों का नाम नहीं लेती हैं, लेकिन उनके जवाब लोगों को राहुल की ओर आकर्षित कर रहे हैं। राहुल द्वारा जीएसटी और अधिकतम खुदरा मूल्य पर दिए गए भाषणों को वे नई तरह से रखने का प्रयास कर रही हैं और लोग उसे सराह रहे हैं। युवा सांसद के तौर पर ये ही पाकिस्तान गई थीं और उनके इस बयान (पाकिस्तान अच्छा है, नर्क नहीं) को लेकर काफी विवाद हुआ था।