18 साल का लड़का ऐसे बन गया किन्नर, देखिए कैसे निभाई गई ये परंपरा
शनिवार का दिन किन्नर समाज के लिए खुशियों की सौगात लेकर आया। इस समाज को एक नया सदस्य मिला।
शनिवार का दिन जोधपुर के किन्नर समाज के लिए खुशियों की सौगात लेकर आया। इस समाज में आज एक नया सदस्य जुड़ गया। मथानिया क्षेत्र की 18 वर्षीय (लड़का) किन्नर को उसके माता-पिता आज यहां गादीपति कांता बुआ को सौंप गए। इसके बाद किन्नर समाज ने खुशी के माहौल के बीच नए सदस्य को अपने रीति-रिवाज के अनुसार अमर सुहाग की प्रतीक लुगड़ी पहना कर अपने समाज में शामिल किया। इसके बाद किन्नरों ने जमकर डांस कर खुशियां मनाई।
- जोधपुर जिले के मथानिया क्षेत्र में अपने परिवार के साथ रहने वाले अंकित को उसके माता-पिता आज किन्नरों की गादीपति कांता बुआ को सौंप गए। उसके परिजनों का कहना था कि अब यह 18 बरस की बालिग हो चुका है। ऐसे में इसकी सहमति लेकर ही इसे आज यहां छोड़ा जा रहा है।
- इसके बाद किन्नरों ने जश्न मना कर नए सदस्य का स्वागत किया। फिर उसे किन्नर समाज में शामिल किए जाने की रस्म अदायगी की गई। कांता बुआ ने बताया कि किन्नर को अमर सुहाग की प्रतीक लुगड़ी ओढ़ाई जाती है। इसके साथ ही गले में मंगलसूत्र भी पहनाया जाता है। हाथों में सुहाग की प्रतीक चुड़ियां पहना कर इससे जुड़े अन्य प्रतीक चिन्ह पहनाए जाते है।
- समाज में शामिल होने के लिए आवश्यक है कि नया किन्नर किसी अन्य किन्नर को अपना गुरु बनाए। ऐसे में कांता बुआ के निर्देश पर किन्नर पायल को उसका गुरु बनाया गया। इसके बाद उसकी गुरु पायल ने अंकित को नया नाम रेखा प्रदान किया।
- अपनी बारादरी में नए सदस्य के शामिल होने से खुश अन्य किन्नरों ने ढोलक की थाप पर लोकगीतों के साथ डांस कर उसका जोरदार स्वागत किया।


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