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अरब देशों से ऐसा भड़का था इजरायल, गलती से दोस्त पर कर दिया था अटैक



इजरायल और अरब देशों के बीच कई बार जंग हुई और हार बार इजरायल की ही जीत हुई। लेकिन, इतिहास के पन्नों में इजरायल के लिए 1967 का वॉर सबसे ज्यादा खास है क्योंकि अकेले इजरायल ने 8 देशों से लड़ी यह जंग सिर्फ 6 दिनों में ही जीत ली थी। इस दौरान इजरायल की एयरफोर्स ने चारों तरफ ताबड़तोड़ कार्रवाई की थी। इस दौरान इजरायल इस कदर बौखलाया हुआ था कि उसकी एयरफोर्स ने आनन-फानन में 'अमेरिकन नेवी टेक्निकल रिसर्च शिप' (USS Liberty) पर ही ताबड़तोड़ कार्रवाई कर दी थी। हालांकि, इजरायली आर्मी शिप को डुबो पाती कि तभी यह जानकारी मिल गई कि ये शिप उसके खास दोस्त अमेरिका की थी

 जून 1967 में इजरायल पर अरब देशों जॉर्डन, इजिप्ट, इराक, कुवैत, सीरिया, सऊदी अरब, सूडान और अल्जीरिया इजरायल पर हमला करने की प्लानिंग में थे।


- हालांकि, इस हमले की भनक इजरायल को लग गई थी। इसलिए उसने एक दिन पहले ही जॉर्डन बेस पर जमा दुश्मन देशों के सैकड़ों फाइटर जेट्स जमीन पर राख के ढेर में बदल दिए थे।


- इसके अलावा इजरायल के फाइटर जेट्स चौबीसों घंटे उड़ान भर रहे थे और देश की ओर आने वाले खतरों पर नजरें गड़ाए थे। इसी दौरान 8 जून को इजरायली नेवी को सूचना मिली कि सिनई

पेनिनसुला के पास मेडिटेरेनियन सी की ओर से एक शिप इजरायल की ओर बढ़ रही है।


- इसके शिकार के लिए इजरायल ने अपनी पनडुब्बियां उसकी दिशा में घुमा दी और फाइटर जेट्स ने भी मोर्चा संभाल लिया। कुछ ही मिनटों में जेट्स शिप के पास जा पहुंचे और उस पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए।



- इजरायल शिप को डुबोने के लिए अपनी सबमरीन से आखिरी वॉर करने वाला था कि तभी इजरायली अधिकारियों को सूचना मिली कि वह शिप अमेरिका की है। तुरंत ही आर्मी को वापस लौटने का ऑर्डर दिया गया।



- इसके अलावा अमेरिकन रेस्क्यू टीम के साथ इजरायल ने अपनी रेस्क्यू टीम भी शिप में तैनात जवानों के लिए भेजी।


- हालांकि, तब तक शिप में मौजूद 34 सैनिकों की मौत और 171, से ज्यादा सैनिक घायल हो गए थे।
- इसके तुरंत बाद इजरायल के तत्कालीन प्राइम मिनिस्टर लेवी इशकोल और फॉरेन मिनिस्टर अबा एबन ने अमेरिका ने सार्वजनिक रूप अमेरिका से माफी मांगी और अमेरिकन जवानों के प्रति सहानुभूति जताई।


- दूसरी तरफ, अमेरिका ने भी इस बात को स्वीकार कर लिया था कि इजरायल से यह गलती कम्युनिकेशन गेप की वजह से हुई।




 27 मई, 1967 को इजिप्ट के तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल नासिर ने घोषणा की थी कि अब अरब के लोग इजरायल का विनाश करना चाहते हैं।


- मई के अंत में इजिप्ट और जॉर्डन के बीच एक समझौता हुआ था कि अगर इजरायल द्वारा एक मुल्क पर हमला हुआ, तो दूसरा मुल्क उसका साथ देगा।


- जून में इजरायल-इजिप्ट सीमा पर युद्ध शुरू हो गया था और जल्द ही ये कई और अरब मुल्कों तक फैल गया।



- इजरायल और इजिप्ट के बीच लड़े गए इस युद्ध में इजरायल के खिलाफ जॉर्डन, इजिप्ट, इराक, कुवैत, सीरिया, सऊदी अरब, सूडान और अल्जीरिया जैसे देश शामिल हो गए थे।



- इस युद्ध को ’सिक्स डेज वॉर’ (6 दिन की जंग) के नाम से भी जाना जाता है। इजरायल पर हमला करने के लिए इन देशों ने जॉर्डन में अपना आर्मी बेस बनाया था। ये देश इजरायल पर अटैक करते कि इससे पहले ही 5 जून को इजरायली एयरफोर्स ने इजिप्ट के तकरीबन 400 फाइटर जेट्स जमीन पर ही उड़ा दिए थे। इससे दुश्मन देश घबरा गए थे और जंग सिर्फ 6 दिन में ही खत्म हो गई थी।



 इजरायल का मानना था कि अगर उसे जीतना है तो पहले ही हमला करना होगा। इसी मकसद से इजरायल ने जॉर्डन के आर्मी बेस पर मौजूद लड़ाकू विमानों पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए थे।


- इजरायली हमले के फौरन बाद इजरायल की सीमा पर अरब मुल्कों की फौजों का जमावड़ा शुरू हो गया था। लेकिन जमीनी लड़ाई में भी इजरायली फौजों ने न केवल इन्हें शिकस्त दी, बल्कि गाजा पट्टी भी अपने कब्जे में कर ली थी।


इस युद्ध में इजरायल के करीब एक हजार सैनिक मारे गए, जबकि साढ़े चार हजार घायल हुए। कई इजरायली सैनिकों को बंधक भी बनाया गया।
- वहीं, अरब देशों में मौत की संख्या और ज्यादा थी। इस युद्ध में अकेले इजिप्ट के ही करीब 15 हजार सैनिक मारे गए थे, जबकि साढ़े चार हजार के करीब सैनिकों को बंधक बना लिया गया था। इसके अलावा जॉर्डन के 6 हजार और सीरिया के करीब एक हजार सैनिक मारे गए थे।