ठेले पर बेचता था कैसेट्स, खड़ी की सबसे बड़ी म्यूजिक कंपनी, 24 देशों में फैला है कारोबार
ये कहानी उस शख्स की है, जिसने हर हिदुस्तानी की जुबां पर बॉलीवुड का संगीत पहुंचा दिया।
5 मई 1951 में दिल्ली के पंजाबी परिवार में एक लड़के पैदा हुआ था, जिसने बॉलीवुड के संगीत को हर घर में पहुंचा दिया। इसका नाम गुलशन कुमार था।
गुलशन कुमार के पिता दिल्ली के दरियागंज इलाके में जूस बेचने का ठेला लगाते थे। लेकिन बेटा पिता के व्यवसाय को नहीं अपनाना चाहता था।
पिता ने भी बेटे पर अपनी सोच नहीं थोपी। लेकिन ये ठेला इस बेटे की जिंदगी बदलने वाला साबित हुआ। बचपन में ही गुलशन कुमार ठेले पर ऑडियो रिकॉर्ड्स बेचने लगे।
बॉलीवुड के विशाल संगीत उद्योग की ओर उनका यह पहला कदम था। हालांकि उस वक्त उनको भी ये भान नहीं था कि एक दिन वो म्यूजिक की दुनिया में ये मुकाम हासिल करेंगे।
उन्हों ने आगे चलकर अपने व्यवसाय को और बढ़ाया और सुपर कैसेट इंडस्ट्री ज के नाम से अपनी कंपनी शुरू की।
बाद में उन्होंयने दिल्लीं से सटे नोएडा में एक म्यूजिक कंपनी खोली और 1970 के दशक में बेहतरीन क्वॉलिटी के संगीत कैसेट बेचने के कारोबार को फैला दिया।
उनका यह व्यवसाय ऐसे फला-फूला कि वह ऑडियो कैसेट का निर्यात भी करने लगे और करोड़पति बन गए।
एक समय ऐसा आ गया कि गुलशन कुमार भारतीय संगीत उद्योग के सबसे सफल व्यक्ति बन गए। इसके बाद उन्हों ने बॉलीवुड की ओर रुख किया और मुंबई आ गए।
गुलशन कुमार ने सुपर कैसेट इंडस्ट्रील के तहत टी-सीरीज संगीत लेबल की स्थापना की। टी-सीरीज देश में संगीत और वीडियोज का सर्वाधिक बड़ा प्रॉड्यूसर है।
यही नहीं ‘टी-सीरीज’ का प्रमुख काम फिल्मों में संगीत देने के अलावा, पुराने गानों के रिमिक्स‘ बनाना, भक्ति संगीत और एलबम आदि का निर्माण करना भी है।
आज भी इंडियन म्युजिक इंडस्ट्री के करीब 60 फीसदी पर गुलशन कुमार की कंपनी का ही कब्जा है।
यह कंपनी 6 महाद्वीपों के 24 से ज्यादा देशों में संगीत का एक्सापोर्ट करती है, जबकि 2500 से अधिक डीलरों के साथ टी-सीरीज देश का सबसे बड़ा डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क भी है।
दिल्लीड को अलविदा कहने के बाद मुंबई आने वाले गुलशन कुमार का सिक्का इस मायानगरी में और भी चमका।
उन्हों ने भक्तिब संगीत के प्रति अपना रुझान बढ़ाया। बाद में उन्होंबने हिंदू पौराणिक कथाओं से संबंधित बेहतरीन फिल्मों और धारावाहिकों का निर्माण भी किया।
गुलशन कुमार की पहली फिल्म 1989 में ‘लाल दुपट्टा मलमल का’ के नाम से आई। जिसका संगीत एक ही रात में पूरे भारत में लोकप्रिय हो गया।
इसी तरह वर्ष 1990 में प्रदर्शित फिल्म ‘आशिकी’ ने सफलता के सारे कीर्तिमान तोड़ दिए।
बाद में 1991 में आमिर खान और पूजा भट्ट अभिनीत ‘दिल है कि मानता नहीं’ का निर्माण किया, फिल्मख उतनी चली नहीं, लेकिन उसका संगीत बॉलीवुड के सर्वाधिक लोकप्रिय गाने दे गया।
गुलशन कुमार बहुत ही कम समय में फिल्म उद्योग में संगीत के बादशाह बन गए। उन्होंरने महज संगीत उद्योग में सफलता के झंडे नहीं गाड़े, बल्किब नई प्रतिभाओं को मौका भी उन्होंने ही दिया।
सोनू निगम, अनुराधा पौडवाल, कुमार शानू और वंदना वाजपेयी जैसे कई गायक गुलशन कुमार की ही देन हैं।
लगातार सफलता हासिल करने वाला यह चेहरा बहुत जल्दक ही मुंबई अंडरवर्ल्डौ के निशाने पर आ गया। इसकी एक बड़ी वजह थी, गुलशन कुमार का सामाजिक रूप से सक्रिय होना।
उनकी यही लोकप्रियता उनके आड़े आ गई और उन्हेंज लगातार मुंबई के अंडरवर्ल्ड से पैसे को लेकर धमकियां मिलने लगीं, लेकिन वह झुके नहीं।
लेकिन 12 अगस्त, 1997 को मुंबई के अंधेरी पश्चिम में जीतेश्वर महादेव मंदिर के बाहर गोली मारकर गुलशन की हत्या कर दी गई।
गुलशन कुमार फिल्मर इंडस्ट्री में हैं नहीं, लेकिन टी सीरीज की चमक आज भी वैसी ही है।


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