हिंदी दिवस पर बोली सनी लियोनी, ‘लोग मेरी हिंदी नहीं सुधारते थे उन्हें वो क्यूट लगती थी’
बॉलीवुड में ऐसी कई एक्ट्रेसेस हैं जो परदेसी हैं पर बॉलीवुड का जाना-माना चेहरा हैं। आमतौर पर अंग्रेजी बोलने वाली ये एक्ट्रेसेस फिल्मी परदे पर धड़ल्ले से हिंदी बोलती दिखती हैं। जाहिर है कि निजी जीवन में हिंदी बोलना इनके लिए मुश्किल काम है। हिंदी दिवस के मौके पर नेक्सा न्यूज़ ने इन हीरोइनों से पूछा - कैसे सुधार रही हैं वो `अपनी हिंदी
सनी लियोनी:
मुझे हिंदी बोलना बहुत पसंद है। लेकिन हां, यह इस पर निर्भर करता है कि मैं किसके साथ बातचीत कर रही हूँ। अगर सामने वाला मुझे असहज महसूस कराए तो मैं बहुत नर्वस हो जाती हूं। ऐसे स्थिति में बोलते-बोलते मैं हाइपर हो जाती हूं और तब मैं फिर से इंग्लिश में बोलना शुरू कर देती हूं। अगर कोई मुझसे शान्ति से, आराम से हिंदी में बात करे तो मुझे उसके साथ हिंदी में बोलना बहुत अच्छा लगता है।
- इसके साथ ही सनी पुरानी बातों को याद करते हुए कहती हैं कि शुरुआत में लोग मेरी हिंदी को सुधारते नहीं थे, क्योंकि उन्हें मेरी हिंदी बहुत क्यूट लगती थी। उस वक्त मुझे यह भाषा सीखने में दिक्कत ज़रूर हुई थी। लेकिन फिर मैंने एक हिंदी टीचर हायर किया, जिससे मैंने सही तरीके से हिंदी बोलना सीखा। उसके साथ-साथ मैंने अपनी फिल्मों से भी हिंदी बोलना सीखा।
- सच कहूं तो ऐसा नहीं है कि मुझे हिंदी बोलना बिल्कुल नहीं आता था, मैं बचपन से ही हिंदी फिल्मों की बहुत बड़ी फैन रही हूं, मेरा बचपन हिंदी फिल्में देखने में बीता है। ऊपर से मेरे पेरेंट्स भी पंजाबी हैं, जो घर में पंजाबी ही बोलते हैं। तो इससे हिंदी समझने में कभी कोई दिक्कत नहीं आई। लेकिन हां, बोलने में थोड़ी दिक्कत जरूर हुई। मेरे हिंदी कोच ने मुझे बहुत कुछ सिखाया है और मैं अभी भी सीख रही हूं।
कैटरीना कैफ:
मुझे हिंदी बोलते वक्त थोड़ी-सी दिक्कत ज़रूर होती है, लेकिन शूटिंग करते समय कोई समस्या नहीं होती। शूट के वक्त तो हमें पूरा ध्यान स्क्रिप्ट पर देना होता है और जब शॉट देना हो तो सहज होकर बस, डायलॉग बोल देने होते हैं। हाँ, डबिंग करते वक्त मुझे थोड़ा ज्यादा वक्त देना पड़ता है। उस वक्त मैं हिंदी के स्पेशलिस्ट्स की राय और मदद लेती हूं और इस बात पर पूरी तरह गौर करती हूं कि हिंदी भाषा का कौन-सा शब्द, किस तरह बोला जाएगा और उसका मतलब क्या होता है।
- अंग्रेजी में किसी चीज के लिए एक या दो शब्द होते हैं, लेकिन हिंदी में उसी शब्द के मायने को आप दस तरीकों से कह सकते हैं। हिंदी ज़ुबान के शब्द, उनका इस्तेमाल और अर्थ, किस तरह उन्हें बोला जाता है, ये सब कुछ जानना और महसूस करना जादुई अहसास है। भाषा ही क्यों, भारत के लोग, भारतीय संस्कृति, महाभारत और रामायण जैसे ग्रंथ, कविताएं, इमेजिनेशन — सब कुछ लाजवाब है।
नरगिस फखरी:
मैं हिंदी में इंटरव्यूज नहीं दे सकती, क्योंकि मैं अंग्रेजी भाषा के साथ पली-बढ़ी हूं। इसलिए उसी में सहजता के साथ बातचीत कर सकती हूं। क्या आप मुझसे ऐसी बातें सुनना चाहते हैं, जिन्हें सुनकर आप कहें कि ऐसा तो हमने कभी नहीं सुना..। तब आप लोग कहेंगे - बड़ा मज़ा आया। तो क्या आप वैसे वाक्य सुनना चाहेंगे या मेरी चीख-चिल्लाहट के साथ अंग्रेजी में मस्ती-भरी बातचीत करना चाहते हैं? मैं अगर आम बोल-चाल की हिंदी पूरे इमोशन में एक प्रवाह के साथ नहीं बोल पाती हूं तो उससे अच्छा है कि अंग्रेजी में ही बात करूं।
- बेशक, मैं हिंदी समझती हूं। मेरी हिंदी की समझ का पैमाना मेरे पास नहीं है, लेकिन जब मैं हिंदी फिल्में देखती हूं तो सब-टाइटिल की हेल्प नहीं लेती। एक समय वह भी था, जब मुझे सब-टाइटिल की मदद लेनी पड़ती थी, लेकिन 'क ख ग घ' सीखते हुए मेरे लिए एक दिन वह भी आया, जब मुझे सब-टाइटिल की मदद नहीं लेनी पड़ी। उस दिन मेरी सिचुएशन ऐसी थी - ‘हू ला ला ला..। (खिलखिलाकर हंस पड़ी नरगिस) अब धीरे-धीरे मेरी हिंदी सुधरती जा रही है। अगर मैं किसी हिंदी बोलने वाले परिवार के बीच रहती तो मैं और जल्दी मैं पिक कर सकती थी।
एली एवराम:
मैंने इस बात को गांठ बांध ली है- जैसा देश वैशा वेश, भारत में आने से पहले मैंने देवनागरी का कोर्स किया था। लेकिन इसके बावजूद मैं हिंदी में बोल नहीं पाती थी। शुरुआत में बहुत गड़बड़ हुई। बोलना कुछ और चाहती थी और बोल कुछ और देती थी और इस बात से लोग मुझ पर बहुत हंसते थे। मतलब मेरी हिंदी उन्हें क्यूट लगती थी, जबकि मुझे बहुत अफसोस होता था। मैं जानती थी कि अगर बॉलीवुड में आपको काम करना है तो मुझको सबसे पहले हिंदी सही से बोलना सीखना होगा। उस वक्त मैंने एक हिंदी टीचर हायर कर लिया। कुछ महीने सीखने के बाद मुझे 'बिग बॉस' में जाने का मौका मिला। 'बिग बॉस' के घर में मेरी हिंदी में काफी सुधार हुआ, मुझमें काफी आत्मविश्वास आ गया था लेकिन इसके बावजूद मैंने सीखना बंद नहीं किया। मैं आज भी हिंदी सीख रही हूँ।
सोफी चौधरी
जब मैं इंग्लैंड से इंडिया आई, तब लोगों को लगा कि मुझे हिंदी बिल्कुल नहीं आती। वो ये सोचकर मुझसे हिंदी में बात करते थे कि ये तो लंदन में पली बढ़ी है, इसे हिंदी क्या आएगी लेकिन उन्हें ताज्जुब तब होता था जब वो मुझसे हिंदी में सवाल करते और मैं उसका जवाब हिंदी में देती थी। वो मेरी हिंदी सुनकर अचंभित रह जाते थे। मुझे हिंदी सिखाने में मेरी नानी का बहुत बड़ा हाथ है। उन्होंने बचपन से ही मुझे हिंदी में बोलना और लिखना सिखाया था। लंदन में चारों ओर इंग्लिश में ही बातें होती थीं, लेकिन उसी माहौल के बीच मेरी नानी ने मुझे हिंदी सिखाया। उनका मानना था कि हिंदी हमारी मातृभाषा है और इसे सीखना बहुत जरूरी है। मेरी शुद्ध हिंदी के पीछे उनकी बहुत बड़ी भूमिका है।
नोरा फतेही:
मेरे लिए हिंदी सीखना बहुत कठिन था। जब आप बच्चे होते हैं तो कोई भी भाषा सीखना आसान होता है, लेकिन बड़े हो जाने के बाद बहुत परेशानी होती है। लेकिन मुझे बॉलीवुड में अपनी जगह बनानी थी और मैं ये जानती थी कि अगर बॉलीवुड में टिकना है तो मुझे भी हिंदी सीखनी होगी। इसीलिए मैंने सीखा, हालांकि शुरुआत में मुझे बहुत दिक्कतें आईं, लोगों से बात नहीं कर पाती थी। फिर मैंने एक हिंदी टीचर को हायर किया, ताकि मैं बेसिक हिंदी सीख पाऊं। कई सारी हिंदी फिल्में और सीरियल देखना शुरू कर दिया था। उसे देख-देखकर लिखना शुरू कर देती थी।
-फिर मैंने लोगों से हिंदी में बात करना शुरू कर दिया था। अगर वो इंग्लिश में बात करते थे तो मैं उन्हें हिंदी में जवाब दिया करती थी। मैं ये देखकर हैरान हो जाती थी कि इंडिया में लोग इंग्लिश बोलना ज्यादा पसंद करते है। यहां तक कि जो ऑटो रिक्शा वाले हैं वो मुझसे इंग्लिश में बात करते हैं ताकि उनकी इंग्लिश भाषा सुधर जाए। लेकिन मुझे हिंदी में बात करनी होती थी, इसलिए तब मैं उनसे ज़बरदस्ती हिंदी में बात करती थी। मैं पिछले तीन सालों से हिंदी सीख रही हूँ और मुझे गर्व है अपने ऊपर, क्योंकि काफी बदलाव आया है मेरी लैंग्वेज में।
क्लाउडिया सिएस्ला
जब मैंने 'बिग बॉस 3' साइन किया था तब मुझे हिंदी बिल्कुल नहीं आती थी। उस वक्त मैं हिंदी समझ तो जाती थी, लेकिन बोल नहीं पाती थी। 'बिग बॉस' के घर से बाहर आते ही मैंने हिंदी सीखने का निश्चय कर लिया था। मुझे इस बात की समझ आ गई थी की अगर मैं हिंदी नहीं बोल पाऊँगी तो इस इंडस्ट्री में टिक पाना मुश्किल जो जाएगा। मुझे शुरुआत में बहुत दिक्कतें आईं। मुझे हिंदी के अक्षर पहचानने से शुरुआत करनी पड़ी थी। मैं एक जर्मन हूँ और मेरे लिए इंग्लिश भी एक नई भाषा है। लेकिन उसे सीखना मेरे लिए इतना और कठिन नहीं था, जितना हिंदी सीखने में दिक्कत हुई। हिंदी से मैं बिल्कुल कनेक्ट नहीं कर पा रही थी, फिर दोस्तों ने मेरी बहुत मदद की। मैं इसके लिए उनकी शुक्रगुज़ार हूं! शुरुआत में मैंने हिंदी सीखने का एक साल का कोर्स किया था। उसके बाद मैंने बहुत प्रैक्टिस की, तब जाकर, 6 सालों बाद मुझे हिंदी बोलने में कॉन्फिडेंस आया है।


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