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जब आर्मी में हुआ सिलेक्शन तो बोली ये लड़की-कुछ कर्ज है देश का हम पर


किसी कवि ने क्या खूब कहा है “खींच के कदमों में मंजिल चली आएगी, हौंसला चाहिए आदमी के लिए”। इसी को चरितार्थ किया है, गोरखपुर की बिटिया सारिया अब्बास ने। ये इंड‍ियन आर्मी की महिला विंग की ऑफिसर्स को तिरंगे को सल्यूट करते देख बड़ी हुई हैं। अब खुद लेफ्टीनेंट बन चुकी हैं। सरिया के मम्मी-पापा ने कहा, ''तिरंगे को बिटिया की जरूरत थी। तो वो तिरंगे के प्रति अपना फर्ज निभाने के लिए पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि जब सरिया का आमी में सिलेक्शन हुआ तो वो बोली- ''पापा देश का हम पर कुछ कर्ज है, उसे चुकाने जा रही हूं।''

शहर के रामजानकी नगर मोहल्ला निवासी सारिया अब्बासी ने 9 सितंबर को चेन्नई स्थित अकादमी की पासिंग आउट परेड किया। इस दौरान पिता डॉक्टर तहसीन-मां रेहाना ने जब उनके कंधों पर स्टार लगाया तो दोनों गर्व से फूले नहीं समा रहे थे।

- सारिया के पिता  डॉक्टर  तहसीन आकाशवाणी गोरखपुर के कार्यक्रम प्रमुख हैं। मां रेहाना भटहट क्षेत्र के अतरौलिया स्थित जूनियर हाई स्कूल में शिक्षिका हैं। लेफ्टिनेंट बनने के बाद पहली बार घर आई सारिया को और उसके माता-पिता को बधाइयां देने का सिलसिला चल रहा है।

 डॉक्टर तहसीन ने बताया, सारिया ने आईएमएस गाजियाबाद से 2015 में बीटेक किया। बीटेक के बाद ही सारिया का सिलेक्शन रेलवे व अन्य सर्विसेज के लिए हुआ, लेकिन उसे तो इंडियन आर्मी में जाने की धुन थी।

- पहले प्रयास में आल इंडिया में 20वीं रैंक आई। दूसरी बार 2016 में सारिया की आल इंडिया में 6th रैंक आई। करीब 11 महीने के कठिन ट्रेनिंग के बाद 9 सितंबर 2017 को चेन्नई में अकेडमी की पासिंग आउट परेड किया।



 वो शुरू से ही पढ़ने में तेज थी। उसके अंदर जोश, जुनून और जज्बा देश के लिए कुछ करने का था। जीएन नेशनल पब्लिक स्कूल से इंटर पास करने के बाद उसका सिलेक्शन इजीनियरिंग के लिए हुआ था।

- वह उसी समय से अपने कमरे में इंडियन आर्मी के जवानों, ऑफिसर्स, लेडी ऑफिसर्स का सल्यूट करते पोस्टर लगा रखा था।


 डॉक्टर  तहसीन ने कहा, 'हमारे समाज में लड़कियों और महिलाओं को लेकर पाबंदी की बात सिर्फ अफवाह है। इतिहास उठाकर देखिए हमारे ही समाज से रजिया सुलतान, सुप्रीम कोर्ट की जज हुई हैं।

- जहां तक हमारे परिवार और हमारी बेटी का सवाल है तो हमने उससे कह रखा था कि तुम्हें जो करना हो खुलकर और निर्भीक होकर करो। जिस वक्त उसका सिलेक्शन इंड‍ियन आर्मी के लिए हुआ तो उसने हमसे कहा कि पापा देश का हम पर कुछ कर्ज है। वो कभी भी पूरा नहीं उतारा जा सकता है पर इंड‍ियन आर्मी में जाकर देश की सेवा कर उसका कुछ परसेंट कर्ज अपने फर्ज के रूप में उतारा जा सकता है।


 सरिया की मां रेहाना ने कहा- ''अपनी पहचान बनानी है तो आप भारतीय सेना में जाइए। वहां आपकी जरूरत है। हमारे वतन भारत के तिरंगे को आपकी जरूरत है। इसकी इज्जत आपको हर कीमत पर करनी है।'' यही जज्बा हमने अपनी बेटी-बेटे में भरा है। बेटी तो अपना फर्ज निभाने और तिरंगे की शान को कायम रखने के लिए वहां तक पहुंच चुकी है। बेटा भी सेना में जाने की तैयारी कर रहा है।