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ये है दुनिया का सबसे जहरीला पेड़, पास जाने की भी हिम्मत नहीं करता कोई


इस धरती पर कई तरह के जहरीले जीव और पेड़-पौधे पाए जाते हैं, लेकिन हम आपको बता दें कि मैंचीनील का पेड़ इस धरती का सबसे जहरीला पेड़ है और इसीलिए लोग इसके पास भी जाने से डरते हैं.

मैंचीनील पेड़ फ्लोरिडा और कैरेबियन सागर के आसपास पाए जाते हैं. आपको बता दें कि इसे दुनिया के सबसे जहरीले पेड़ के तौर पर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया गया है.

यह पेड़ इतना जहरीला होता है कि इससे लोगों को कोई परेशानी न हो इसलिए इस पेड़ पर चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं. इस पेड़ का वैज्ञानिक नाम हिप्पोमेन मनीसिनेल्ला है,

जिसे मैंचीनील के नाम से भी जाना जाता है. इसका यह नाम इसके सेब जैसे छोटे-छोटे फलों के कारण पड़ा है. इस पेड़ की लंबाई लगभग 50 फीट होती है, इनकी पत्तियां अंडाकार और चमकदार होती हैं.

आपको बता दें कि इस पेड़ का सबसे जहरीला हिस्सा इसका फल है, मैंचीनील के फल खाते ही मौत हो जाती है.

इसके जहरीलेपन का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि इसके फल के रस की एक भी बूंद अगर त्वचा पर गिर जाए तो उस जगह की त्वचा फट जाती है और उसमें असहनीय जलन और पीड़ा होती है.

इसके अलावा अगर इसके फलों को जलाया जाए तो इससे निकलने वाले धुएं से इंसान अंधा हो सकता है. अगर इसका एक फल कोई खा ले तो उसकी मौत निश्चित है. इसी के साथ ही अगर बारिश के मौसम में इस पेड़ के नीचे खड़े हो जाएं तो आपके पूरे शरीर में खुजली और जलन होने लगेगी.

 ये सिर्फ शरीर पर ही नहीं असर करता, अगर आपने अपनी गाड़ी इसके नीचे खड़ी कर दी तो उस गाड़ी का पेंट भी खराब हो जाएगा.

ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में छपी एक खबर की माने तो एक रेडियोलॉजिस्ट निकोला एच स्ट्रिकलैंड ने मैंचीनील के फल का स्वाद चखा था. दरअसल कैरेबियन द्वीप के समुद्री किनारे पर निकोला को सेब के आकर का एक छोटा फल मिला था

और वह फल काफी लंबे और बड़े पेड़ से गिरा था, जिसमें चमकीले रंग की तिरछी लाइनें बनी हुई थीं. उन्होंने इस फल को उठाया और उसका जरा सा स्वाद चखा. उनके साथ ही उनके दोस्तों ने भी इस फल का स्वाद चखा था.

कुछ पलों में उनके मुंह में अजीब प्रकार का स्वाद महसूस होने लगा और उसमें बेहद जलन होने लगी. उनको ऐसा लग रहा था जैसे उनकी जीभ को काट दिया गया हो और साथ ही उनका गला पूरी तरह से अकड़ने लगा.

इसके बाद लगभग 2 घंटे तक उनकी स्थिति काफी गंभीर बनी रही. लगभग 8 घंटे बाद उनकी सूजन कुछ कम हुई. इसके बाद उनके गले में सूजन हो गई और वो दूध और पानी के अलावा कुछ भी खा नहीं पा रहे थे.