सैंकड़ों सालों से समुद्री रेत में दफन थे ये स्ट्रक्चर, पैर की ठाेकर से आए थे सामने
वैसे तो इंडिया के कई विरासत कई सालों तक मिट्टी के ढेर में दबी रही, कुछ डिस्ट्रॉय हो गई लेकिन आज हम आपको बताने वाले हैं उस विरासत के बारे में जो सालों तक समुद्री रेत में दबी रही।
पत्थर से बने विशाल मंदिर कई सालों तक रेत के अंदर दबे रहे लेकिन जब ये दुनिया के सामने आए तो लोग हैरान रह गए।
तमिलनाडु के महाबलीपुरम में सप्त पगोडा के नाम से फेमस ये स्ट्रक्चर 7 वीं सदी में पल्लव डायनेस्टी में बने थे। जैसे ही उनका गोल्डन ऐरा खत्म हुआ ये मंदिर समय की गर्त में समा गए।
एक समय ये सारे स्ट्रक्चर समुद्र की रेत से ढक गए और और कई सालों तक ये ऐसे ही रहे।
बाद में जब एक अंग्रेज वहां आया और गलती से उसके पैरों से रेत हटी तो नीचे ये विरासत दिखी। बाद में जब इसकी खुदाई हुई तो दुनिया के सामने ये विरासत सामने आई। अब ये जगह 'विश्व विरासत स्थल' में शामिल है।
साम्राज्य का प्राचीन समुद्र बंदरगाह
महाबलीपुरम, प्रसिद्ध पल्लव साम्राज्य का प्राचीन समुद्र बंदरगाह था। पल्लवों ने कांचीपुरम को राजधानी बनाकर से तीसरी से आठवीं सदी के बीच शासन किया था।
वहां पाए गए एक शिलालेख के अनुसार महाबलीपुरम के स्मारकों को पल्लव राजा महेन्द्र वर्मन और उनके बेटे नरसिंह वर्मन और उनके वंशजों द्वारा निर्माण किया गया था।

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