इनके नाम पर शुरू हुई थी रणजी ट्रॉफी, ऐसे बने 'फादर ऑफ इंडियन क्रिकेट'
10 सितंबर 1872 को भारत के पहले क्रिकेटर का जन्म हुआ था । जिन्होंने देश और दुनिया के इतिहास में अपना नाम दर्ज करवाया। क्रिकेटर रणजीत सिंह ऐसे भारतीय थे, जिन्होंने गुलाम भारत में ब्रिटिश क्रिकेट टीम में न सिर्फ अपनी जगह बनाई बल्कि अंग्रेजों को कई मैच भी जिताए।
1933 में रणजीत सिंह की मौत हो गई, मौत के बाद भारत में 1934 में इस क्रिकेटर की याद में रणजी ट्राफी की शुरुआत की गई। रणजीत को भारतीय क्रिकेट का जन्मदाता माना जाता हैं।
- शुरुआती समय में क्रिकेट केवल इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले जाते थे। ऐसी उम्मीद भी नही थी भारत में जन्में इस खिलाड़ी को इंग्लैंड टीम में जगह मिलेगी भी या नही।
- क्रिकेट में रणजीत का अच्छा रिकॉर्ड है, रणजीत ने 307 फस्ट क्लास खेले । इन मैचों में 56 की औसत के साथ 24692 रन बनाए। जिसमें 72 शतर और 109 अर्धशतक शामिल है। रणजीत लगातार 4 साल तक कैप्टन रहे।
- रणजीत सिंह को भारतीय क्रिकेट का जन्मदाता भी कहा जाता हैं।
यहां हुआ था जन्म
क्रिकेटर रणजीत सिंह का जन्म 10 सितंबर 1872 को नवानगर राज्य के सदोदर नामक गांव में जाडेजा राजपूत परिवार में हुआ। उनके पिता का नाम जीवन सिंह और दादा का नाम झालम सिंह था जो नवानगर के महाराजा जाम साहेब विभाजी जाडेजा के परिवार में से थे।
रणजीत सिंह का क्रिकेट के लिए कोई खास इंटरेस्ट नहीं था, वे बचपन से टेनिस प्लेयर बनना चाहते थे। लेकिन जब वे पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए तो उन्हें क्रिकेट पसंद आने लगा। इंग्लैंड में क्रिकेट के प्रति लोगों का क्रेज देखकर रणजीत ने क्रिकेटर बनने का फैसला लिया।
- जब रणजीत सिंह का इंग्लैंड टीम सेलेक्शन हुआ उस वक्त लार्ड हारिस ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि रणजीत का जन्म इंग्लैंड में नही हुआ है तो वो इंग्लैंड की तरफ से नही खेल सकते। रणजीत का 1896 में इंग्लैंड टीम सेलेक्शन हुआ था।
इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए दूसरे टेस्ट में रणजीत को मौका मिला। इस मैच में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपनी पहली पारी में रणजीत ने इंग्लैंड की तरफ से 62 रन बनाए थे। जहां इंग्लैंड के खिलाड़ी एक एक कर पवेलियन लौट रहे थे, वहीं रणजीत सिंह पूरा मोर्चा संभाले हुए थे।

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