एक दिन में 28 गाने गा चुका ये सिंगर, इस वजह से हुआ म्यूजिक इंडस्ट्री से दूर
90's के पॉपुलर सिंगर कुमार सानू 60 साल के हो चुके हैं। 22 सितंबर, 1957 को कोलकाता में जन्मे केदारनाथ भट्टाचार्य उर्फ कुमार सानू को 1990 में आई फिल्म 'आशिकी' के गानों ने रातोंरात स्टार बना दिया।
उस दौर में एक से बढ़कर एक हिट गाने देने वाले कुमार सानू ने जो कामयाबी हासिल की वो हर किसी के बूते की बात नहीं।
लंबे वक्त से म्यूजिक इंडस्ट्री से दूर कुमार सानू ने 2015 में आई रोमांटिक कॉमेडी फिल्म 'दम लगाके हइशा' में कुछ गानों को अपनी आवाज दी। कुमार सानू के नाम एक दिन में 28 सॉन्ग गाने का रिकॉर्ड गिनीज बुक में दर्ज है। इसलिए म्यूजिक इंडस्ट्री से दूर हैं
- कुमार शानू ने लंबे समय से बॉलीवुड फिल्मों के लिए कोई गीत नहीं गाने के सवाल पर एक इंटरव्यू में कहा था कि मैं अश्लीलता से जुड़े गाने नहीं गा सकता।
- उनके मुताबिक, आज के समय के गानों में अश्लीलता की भरमार है। गानों का कोई मतलब नहीं है। चार बोतल वोदका, काम मेरा रोज का... जैसे गाने चल रहे हैं।
- कुमार सानू के मुताबिक, मैं खुद ऐसे गाने गाकर म्यूजिक इंडस्ट्री को खराब नहीं करना चाहते।
आज के समय में चंद प्रोड्यूसर जैसा चाहते हैं, वैसे गाने बनते हैं ना कि दर्शक जैसा चाहते हैं।
कुछ ऐसी है कुमार सानू की फैमिली
कुमार शानू ने दो शादियां की हैं। 1994 में उन्होंने दूसरी शादी की। उनकी वाइफ का नाम सलोनी सानू है। इससे पहले कुमार सानू ने रीता से शादी की थी।
हालांकि उन्होंने 1994 में रीता से तलाक ले लिया। दूसरी पत्नी सलोनी से सानू के तीन बच्चे हैं, जिनमें दो लड़कियां शानोन के और अन्ना हैं। उनके लड़के का नाम कुमार जानू है। कुमार सानू की दोनों बेटियां सिंगिंग की ट्रेनिंग ले रही हैं, जबकि उनका बेटा चाइल्ड सिंगर है।
किशोर दा को मानते हैं आइडल
कुमार सानू किशोर दा को अपना आइडल मानते हैं। साथ ही, अपनी इस ख्याति का असली क्रेडिट पिता पशुपतिनाथ भट्टाचार्य को देते हैं। कुमार सानू बहुत अच्छे तबला वादक भी हैं।
बांग्लादेशी फिल्म से शुरू किया था करियर
कुमार सानू ने करियर की शुरुआत साल 1986 में बांग्लादेशी फिल्म 'तीन कन्या' से की थी। वैसे, सानू को हिंदी सिनेमा में लाने का क्रेडिट दिवंगत गायक जगजीत सिंह को जाता है। उन्होंने कुमार सानू को फिल्म 'आंधियां' में गाना गाने का ऑफर दिया था। जगजीत सिंह ने उनकी मुलाकात कल्याणजी आनंद से कराई और उन्हीं के कहने के बाद उन्होंने अपना नाम केदारनाथ भट्टाचार्य से कुमार सानू कर लिया था।
सॉन्ग को कम्पोज करके गाना ही असली सिंगिंग
- कुमार सानू के मुताबिक असली गायक कलाकार कम्पोजिशन के बाद खुद अपने इमेजिन आइडिया से नई चीजें गाकर पेश करता है। वही असली गायक है।
- कुमार सानू के नाम पांच बार लगातार फिल्मफेयर अवॉर्ड जीतने का रिकॉर्ड भी है।
- बड़े पर्दे पर कई फिल्मों के लिए गा चुके कुमार सानू छोटे पर्दे पर भी कई सिंगिंग बेस्ड रियलिटी शो में बतौर जज नजर आ चुके हैं।
पॉलिटिक्स और म्यूजिक का कोई रिलेशन नहीं
- राजनीति में आने के सवाल पर कुमार सानू का मानना है कि वे दो बार राजनीति में गए। पहली बार उन्होंने 2004 में बीजेपी की मेंबरशिप ली लेकिन कुछ कारणों से छोड़ दी।
हालांकि बाद में 2014 में उन्होंने दोबारा इसी पार्टी की सदस्यता ली है। उनके मुताबिक राजनीति और म्यूजिक का कोई रिलेशन नहीं है।
- राजनीति में आने का मकसद उनके कोलकाता और दिल्ली में संचालित स्कूलों के लिए सरकार से पैसा लेना था।
- सानू का कहना था कि वे प्रणब मुखर्जी, अटल बिहारी वाजपेयी, इंदिरा गांधी जैसे लीडर्स को पसंद करते हैं इसलिए वे अच्छी लीडरशिप के लिए राजनीति से जुड़े।

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