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12 साल की उम्र में बन गए थे महाराजा, पास है अरबों की संपत्ति


घुड़सवारी और पोलो खेलने के शौकीन हैं जयपुर के महाराजा

जयपुर के महाराजा सवाई पद्मनाभ सिंह इन दिनों अंतरराष्ट्रीय पोलो की दुनिया में पहचान बना रहे हैं। हाल ही में लंदन के हेनले में आयोजित दुनिया के प्रतिष्ठित ब्रिटिश पोलो डे के मैच में उन्होंने हिस्सा लिया। 12 जुलाई को उन्होंने 19वां बर्थडे मनाया।

राजनीति में आने की ख्वाहिश
पद्मनाभ सिंह की यह मंशा है कि पढ़ाई के बाद वे राजनीति में आकर देश की सेवा करेंगे, क्योंकि लोग राजपरिवार की तरफ उम्मीदों से देखते हैं।
ये मिले अधिकार
स्व. भवानी सिंह के बेटे के रूप में पद्मनाभ को 18 साल की उम्र पाने के साथ ही सभी मामलों में उत्तराधिकारी होने के कानूनी अधिकार मिलेंगे। साथ ही भवानी सिंह के नाम से जुड़ी सभी अदालती कार्रवाइयां पद्मनाभ सिंह के नाम से लड़ी जाएंगी। इसके अलावा बैंकों के खातों का
लेन-देन व अन्य कार्य भी पद्मनाभ के नाम से होगा।
जयपुर के पूर्व महाराजा ब्रिगेडियर भवानी सिंह के निधन के बाद 2011 में उनके उत्तराधिकारी के रूप में सवाई पद्मनाभ सिंह का राजतिलक हुआ। उस समय पद्मनाभ की उम्र महज 12 साल थी। पद्मनाभ जयपुर के पूर्व राजघराने के अब तक के सबसे छोटे प्रमुख बने।
ऐसे बने महाराजा
आजादी के बाद रजवाड़ों को खत्म कर दिया गया, पर अब भी पूर्व राज परिवारों में राजतिलक कर उत्तराधिकार हस्तांतरित किया जाता है। अप्रैल 2011 में दीया कुमारी के बड़े बेटे पद्मनाभ सिंह का जयपुर के राजघराने में पूरे शाही ठाठ के साथ राजतिलक किया गया। दरअसल भवानी सिंह का कोई बेटा नहीं था, उन्होंने 2002 में एकमात्र संतान दीया कुमारी के बड़े बेटे पद्मनाभ सिंह को गोद लिया था।
ये हैं खास शौक
12 जुलाई 1998 को जन्मे पद्मनाभ बेहद शाही अंदाज में अपना जीवन जीते हैं। कम उम्र में ही वे विंटेज कार से लेकर आज के समय की एडवांस लग्जरी कार तक के शौकीन हैं। यही नहीं, वे कपड़ों के मामले में भी बेहद स्टाइलिश हैं। कभी वे सिर पर पगड़ी बांधे राजसी ठाठ-बाट वाले पुश्तैनी कपड़े और हाथ में तलवार लिए हुए रॉयल लुक में दिखते हैं, तो कभी पूरी तरह वेस्टर्न लुक में रहते हैं। उन्हें घुड़सवारी का शौक बचपन से ही रहा है।
ये है संपत्ति की स्थिति
जयपुर राजघराने के पास अरबों की संपत्ति है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने राजपरिवार की कई संपत्तियों पर 1992 से रिसीवर नियुक्त कर रखा है। तब से अब तक इन पर कोई फैसला नहीं हो पाया है। भवानी सिंह के पिता सवाई मानसिंह द्वितीय की जो भी संपत्ति थी, मानसिंह के बाद भवानी सिंह उसके उत्तराधिकारी बने। तब से 1986 तक सब कुछ ठीक-ठाक रहा, उसके बाद संपूर्ण संपत्ति के बंटवारे को लेकर पूर्व राजमाता गायत्री देवी, भवानी सिंह के भाई जयसिंह, पृथ्वी सिंह और जगतसिंह एक ओर आ गए। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में संपत्ति बंटवारे का दावा कर दिया। तब से अब तक राजपरिवार की काफी संपत्तियों पर केस चल रहे हैं।