सरकार चलाने के लिए तानाशाह के पास नहीं पैसा, बेच रहा देश के लोगों को
बीते सालों में नॉर्थ कोरिया सरकार ने पैसे कमाने के लिए गलत तरीकों का सहारा लिया। इसमें हथियार बेचने, ड्रग स्मगलिंग और नकली यूएस डॉलर करेंसी का धंधा करना शामिल था, लेकिन यूनाइटेड नेशन्स द्वारा प्रतिबंध लगाने के बाद उसकी आमदनी के जरिए बंद हो गए। उसके बाद उसने विदेशी करेंसी कमाने के लिए गुलाम मजदूरों का धंधा शुरू कर दिया है। नॉर्थ कोरिया सरकार ने अपने हजारों नागरिकों को गुलाम मजदूर बनाकर रूस भेजना शुरू कर दिया है।
दक्षिण कोरिया की राजधानी सिउल स्थित ‘डाटा बेस सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स’ की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर कोरिया से करीब 50 हजार लोग रूस भेजे गए हैं।
- रूस में गुलामी कर रहे कोरियाई नागरिकों को काम की एवज में रूस द्वारा नॉर्थ कोरिया को 120 मिलियन डॉलर (करीब साढ़े सात हजार करोड़ रुपए) दिए जाते हैं।
- रिपोर्ट के मुताबिक, तानाशाह किम जोंग उन को सरकार चलाने के लिए फंड की कमी पड़ रही है। इसलिए इन पैसों का यूज सरकारी जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जा रहा है।
मजदूरों का होता है शोषण
- ये गुलाम मजदूर हिंसा का शिकार भी होते हैं। अधिकारी इनसे 15-15 घंटें तक का काम लेते हैं और उनके वेतन का हिस्सा भी खा जाते हैं।
- इन कोरियाई मजदूरों को रूस में 841 डॉलर (करीब 54 हजार रूपए) प्रतिमाह के हिसाब से दिए जाते हैं। इसमें से आधे से ज्यादा वेतन कोरिया की सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी द्वारा जब्त कर लिए जाता है।
- इसके अलावा आगे भी गुलाम मजदूरों की तनख्वाह का करीब 20 फीसदी हिस्सा कंस्ट्रक्शन दल के बॉस द्वारा अपने पास रख लिया जाता है।
- आश्चर्य की बात यह है कि गुलामों जैसी मजदूरी करने के बावजूद कोरियाई नागरिक रूस जाने के लिए अधिकारियों को रिश्वत भी देते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कोरिया की आर्थिक हालात खराब होने के चलसे लोग दूसरे देश में गुजारा करना आसान समझते हैं।
- रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में हाल ही में बने फुटबॉल मैदान के निर्माण में भी इन्हीं कोरियाई मजदूरों का उपयोग किया था। रूस की राजधानी मॉस्को में बन रहे लग्जरी अपार्टमेंट्स बनाने में भी कोरियाई मजदूरों की मदद ली जा रही है।

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