जब नसीर को देख शबाना बोली थीं - ऐसे बदसूरत लोग कैसे बन सकते हैं एक्टर
बॉलीवुड में जब भी कोई नया कलाकार किस्मत आजमाने आता है तो इंडस्ट्री के लोग उनके बारे में अपनी एक धारणा बना लेते हैं। ऐसी ही एक धारणा शबाना आजमी ने बनाई थी जब नसीरुद्दीन शाह फिल्म इंडस्ट्री में आए थे।
नसीर को देखकर शबाना ने कहा था, 'ऐसे बदसूरत लोग कैसे एक्टर बन सकते है'। हालांकि, ये बात और है कि शबाना आजमी ने बाद में नसीरुद्दीन के साथ कई फिल्मों में काम किया था और कई फिल्में हिट भी रही। बता दें कि नसीरुद्दीन शाह आज अपना 68वां बर्थडे सेलिब्रेट (20 जुलाई) कर रहे हैं। अपने चेहरे को लेकर नसीर ने मन में हीन भावना थी...
बॉलीवुड में अपना एक मुकाम बनाने वाले नसीरुद्दीन की लाइफ में एक वक्त ऐसा भी जब उन्हें अपने चेहरे को लेकर मन में हीन भावना थी। उन्होंने खुद एक इंटरव्यू में बताया था कि उनका चेहरा फिल्म स्टार लायक नहीं था। नसीर ने इंटरव्यू में एक वाक्ये का जिक्र करते हुए बताया था, 'मेरी और ओम पुरी की एनएसडी के दौरान की एक फोटो देखकर शबाना आजमी ने कहा था दो ऐसे बदसूरत इंसान कैसे एक्टर बनने की जुर्रत कर सकते हैं।
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में जन्में नसीरूद्दीन शाह ने अपनी पढ़ाई अजमेर से की। 1971 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से उन्होंने ग्रैजुएशन किया। ग्रैजुएशन करने के बाद उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) में एडमिशन लिया। हालांकि, एक्टिंग उन्होंने मात्र 14 साल की उम्र में ही शुरू कर दी थी। उन्होंने शेक्सपीयर के नाटक 'मर्चेट ऑफ वेनिस' में काम किया था।
नसीर ने बताया था कि उनके पिता चाहते थे कि वे डॉक्टर, इंजीनियर या आर्मी ऑफिसर बनें लेकिन वे खुद अपने को अच्छा स्टूडेंट नहीं मानते थे।
लिटरेचर के अलावा उन्हें अन्य सब्जेक्ट में कोई दिलचस्पी नहीं थी। पढ़ाई में अच्छा न होने के कारण स्कूल में होने वाले नाटकों में भी उनका चयन नहीं होता था। उन्होंने अपने चार दोस्तों के साथ मिलकर कुछ कर गुजरने की ठानी और 'मर्चेट ऑफ वेनिस' का मंचन किया। बता दें कि इसी नाम से 1969 में एक फिल्म भी बनी थी, जो कभी रिलीज नहीं हुई थी। जब वे 18 साल के थे, तो उन्होंने राज कपूर और हेमा मालिनी की फिल्म 'सपनों के सौदागर' में काम किया। लेकिन फिल्म रिलीज से पहले ही उनके सीन्स को हटा दिया गया था।
एनएसडी से पास होने के बाद उन्होंने बॉलीवुड में किस्मत आजमाना शुरू की। हालांकि, यहां उन्होंने काम मिलना आसान नहीं था। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि, 'जब मुझे इंडस्ट्री में काम नहीं मिल रहा था तो मैंने सोचा कि यहां आकर गलती तो नहीं की। काम न मिलने के कारण मैं मायूस भी हुआ था, लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी थी। मुझे अंदर से लग रहा था कि मैंने यहां आकर कोई गलती नहीं की है। अगर मैं लगा रहूंगा तो सफलता जरूर मिलेगी'। उन्होंने शुरुआती दौर में मसाला फिल्में भी की। वे कहते हैं, 'मैंने जो भी मसाला फिल्में की वो मेरी सबसे बड़ी भूल थी। वे बहुत बुरी फिल्में थीं'।
1975 में उन्होंने फिल्म 'निशांत' से डेब्यू किया था। इस फिल्म को बेस्ट फिल्म का नेशनल अवॉर्ड भी मिला था। इतना ही नहीं ये फिल्म ऑस्कर के लिए भी नॉमिनेट हुई थी। बॉलीवुड में डेब्यू करने के दो साल बाद उन्होंने 1977 बेनजामिन गिलानी और टॉम ओल्टर के साथ मिलकर मोटले प्रोडक्शन हाउस नाम से एक थिएटर ग्रुप की शुरुआत की थी।
बता दें कि नसीर आज भी थिएटर से जुड़े हैं। उन्होंने 'मंथन' (1977), 'सुनैना' (1979), 'हम पांच' (1980), 'चक्र' (1981), 'बाजार' (1982), 'सितम' (1982), 'गुलामी' (1985), 'हीरो हीरालाल' (1988), 'त्रिदेव' (1989), 'विश्वात्मा' (1992) 'कृष' (2006), 'बेगम जान' (2017) सहित कई फिल्मों में काम किया है। शाह की पहली पाकिस्तानी फिल्म 'खुदा के लिए' (2007) थी। इसके बाद उन्होंने दूसरी पाकिस्तानी फिल्म 'जिंदा भाग' (2013) में काम किया।
बता दें कि नसीर के बारे में अपनी अलग राय रखने वाली शबाना ने बाद में उन्हीं के साथ कई फिल्मों में काम किया था। नसीर ने अपनी डेब्यू मूवी में ही शबाना आजमी के साथ स्क्रीन शेयर की थी। ये फिल्म थी 'निशांत'। इसके अलावा दोनों ने फिल्म 'जुनून' (1978), 'अलबर्ट पिन्टो को गुस्सा क्यों आता है' (1981), 'हम पांच' (1981), 'मासूम' (1983), 'मंडी' (1983), 'स्पर्श' (1984), 'लिबाज' (1988) सहित अन्य फिल्मों में काम किया।


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