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घर में अकेली थी लड़की, केकड़े पकाने के बहाने घुसे और किया ये काम


मध्य प्रदेश में बैतूल जिले में 16 नवंबर 2016 को हुए 13 साल की लड़की से गैंगरेप मामले में अपर सत्र न्यायाधीश मोहन तिवारी ने आरोपी विनय धुर्वे को फांसी की सजा सुनाई है। वहीं, दो नाबालिग आरोपियों पर किशोर न्यायालय में मामला विचाराधीन है। क्या हुआ था उस दिन...

रायखेड़ा के रहने वाले नाबालिग लड़की 16 नवंबर 2016 को घर पर अकेली थी। उसके माता-पिता रिश्तेदारी में दूसरे गांव गए थे।
- लड़की की छोटी बहन और एक भाई स्कूल गए हुए थे। छोटा भाई मवेशी चराने के लिए जंगल गया था।
- इस बीच दोपहर में विनय अपने दो नाबालिग साथियों के साथ लड़की के घर पहुंचा।
- विनय ने लड़की से कहा वो डैम से केकड़े पकड़कर लाया है उसे बनाओ।
- घर में लड़की को अकेला देखा तो विनय और उसके दो नाबालिग साथियों ने उसे पकड़कर जमीन पर पटक दिया।
- इसके बाद विनय और दोनों नाबालिगों ने लड़की के साथ गैंगरेप किया और फिर गला घोंटकर हत्या कर दी।
- दरिंदे यही नहीं रुके, उन्होंने साड़ी से घर की छत पर लगी म्याल की बल्ली से उसका शव लटका दिया था।
क्या फैसला सुनाया कोर्ट ने...
- इस मामले में 7 माह 15 दिन में 28 लोगों की गवाही के बाद गुरुवार को अपर सत्र न्यायाधीश मोहन तिवारी ने आरोपी विनय धुर्वे को फांसी की सजा सुनाई है।
- सरकारी वकील राजेश साबले ने बताया आमला पुलिस के चालान पेश करने के बाद 17 जनवरी 2017 को न्यायाधीश मोहन तिवारी के न्यायालय में प्रकरण की सुनवाई शुरू हुई।
- न्यायालय में प्रकरण की सुनवाई के दौरान पीड़िता के छोटे भाई, बहन सहित 28 लोगों ने न्यायालय में विनय के खिलाफ गवाही दी।
- तत्कालीन टीआई एसके यादव, डॉ. राजेंद्र पदमाकर, डॉ. आनंद मालवीय सहित भोपाल के वैज्ञानिक अधिकारी की भी गवाही हुई।
- इसके बाद 22 जून 2017 को न्यायालय ने आरोपी विनय धुर्वे को रेप कर हत्या करने के आरोप में दोषी ठहराया था। इसके बाद गुरुवार को फैसला सुनाया गया।
44 पेज के फैसले में इन धाराओं में सुनाई सजा
- न्यायाधीश मोहन तिवारी ने 44 पेज के फैसले में आरोपी विनय धुर्वे को धारा 449 में उम्रकैद और 25 हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया। धारा 376 क में दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड, धारा 376 घ में उम्रकैद और 25 हजार रुपए अर्थदंड, धारा 302 में मृत्युदंड और 25 हजार रुपए, धारा 354 (5) में मृत्युदंड से दंडित किया। न्यायालय ने दोषी आरोपी विनय को जेल वारंट बनाकर उच्च न्यायालय जबलपुर से दंडादेश की पुष्टि होने तक जेल की अभिरक्षा में रखने के आदेश दिए है।