टीचर को लड़की के बैग से मिला ये, तो वो सहेली के साथ कूदी नहर में
सेंटीनल कैंब्रिज इंटरनेशनल स्कूल की नौवीं की दो लड़कियों ने शुक्रवार देर शाम बिस्त दोआब नहर में छलांग लगा दी। एक लड़की की लाश देर शाम मेहंदीपुर पुल के पास से मिल गई है जबकि दूसरी लड़की के बारे में देर रात तक कुछ भी नहीं पता चल सका था। पुलिस की अब तक की जांच में सामने आया कि स्कूल में एक लड़की के पास से शुक्रवार को मोबाइल मिला था। और टीचर्स ने उसे अपने पेरेंट्स को सुबह स्कूल में साथ लाने को कहा था। ये था मामला...
- इस हादसे में गांव सुधा माजरा की मनप्रीत कौर की मौत हो गई जबकि गांव चाहलां की रूपिंदरजीत का कुछ पता नहीं चल पाया है।
- 14 साल की इन दो सहेलियों के नहर में कूदने से इलाके में सनसनी फैल गई है। बताया गया है कि रूपिंदर कौर के पास से टीचर्स को मोबाइल मिला था।
मनप्रीत की नाक से निकल रहा था झाग
- मनप्रीत कौर और रूपिंदरजीत कौर दोनों स्कूल में सहेलियां थी और एक ही बस में सुबह स्कूल आती थीं।
- स्कूल में वे दोनों अकसर अलग-अलग बसों में जाती थीं मगर शुक्रवार को वह एक ही बस में घर को गईं।
- दोनों सहेलियां जनता स्वीट्स चौक में बस से उतरीं और फिर नहर की तरफ गई। मनप्रीत कौर का गांव रूपिंदर कौर के गांव के बाद आता है।
- पुलिस यह जांच कर रही है कि शुक्रवार सुबह भी दोनों घर से स्कूल के लिए आईं और ट्यूशन के बाद घर जाने के लिए एक ही बस में क्यों गईं और मनप्रीत रास्ते में क्यों उतरी।
- परिवार वालों का कहना है कि जब बस में अन्य अध्यापक भी रहते हैं तो लड़कियों को उतरने क्यों दिया गया। पुलिस ने पूछताछ के लिए स्कूल अध्यापकों को भी थाने में बुला लिया है।
- एएसआई राम प्रकाश ने बताया कि मामले की जांच जारी है और परिवार वालों के बयान के बाद कार्रवाई की जाएगी।
मामले की कड़ियां जोड़ना अहम
- पुलिस के लिए सबसे अहम घटना की कड़ियों को जोड़ना है। 14 साल की छोटी उम्र में आत्महत्या करना बच्चियों के लिए आसान नहीं रहा होगा।
- ऐसी क्या वजह थी कि उन्होंने नहर में छलांग लगा दी या फिर उन्हें किसी ने वहां फेंका। नहर से बरामद छात्रा के जूते व जुराबें भी अभी नहीं मिल पाई हैं।
- इसके अलावा उनके नाक से झाग भी निकल रही थी, ऐसे में सवाल उठने लाजिमी हैं। वैसे अगर वे स्कूल से घर जाने के लिए बस में सवार हुई थीं तो रास्ते में कैसे उतर गईं, पुलिस को इस जांच में इन सवालों के जवाब ढूंढने होंगे, तभी मामले की कड़ियां जुड़ पाएंगी।
एक महीने में नहर में डूबने की दसवीं घटना
- बिस्त दोआब नहर में एक महीने के दौरान नहर में कूदने वालों की यह दसवीं घटना है।
- इनमें से सिर्फ तीन लोगों को ही बचाया जा सका है, जबकि सात की डूबने या फिर अन्य वजहों से मौत हो गई।
- बिस्त दोआब नहर के इस हिस्से को इसलिए अब लोग खूनी नहर का नाम भी देने लगे हैं।
- नहर के पक्का होने तथा आसपास पेड़ न होने की वजह से एक बार नहर में गिरने वाले का बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है।

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