गैंगस्टर की बेटी को चाहिए इंसाफ, दुबई से कहा- पुलिस ने परिवार को रखा भूखा

आनंदपाल सिंह के शव का 20 दिन बाद नागौर जिले के सांवराद गांव में पुलिस फोर्स की मौजूदगी में अंतिम संस्कार कर दिया गया।
राजस्थान में गैंगस्टर आनंदपाल सिंह के शव का 20 दिन बाद गुरुवार शाम को उसके पैतृक गांव नागौर जिले के सांवराद गांव में भारी पुलिस फोर्स की मौजूदगी में अंतिम संस्कार कर दिया गया। कर्फ्यू के बीच अंतिम संस्कार के दौरान किसी आम आदमी को सांवराद गांव में प्रवेश नहीं दिया गया। आनंदपाल की बड़ी बेटी चीनू ने दुबई से दैनिक भास्कर से फोन पर कहा कि यदि उन्हें और उनके परिवार को न्याय नहीं मिला तो वे सुसाइड कर लेंगी। चीनू दुबई में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही हैं। आनंदपाल की बेटी का आरोप, पुलिस ने पार कर दीं सारी हदें...
- चीनू ने बताया कि आज हमारे घर पर पुलिस ने हदें पार कर दी। परिवार के सभी पुरुष सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया। मेरी मां, बहन, भाई बेहोश हैं। हमारे घर पर कोई पुरुष सदस्य नहीं था।
- चीनू का कहना है कि कानून की बात है तो कानून और संविधान के अनुसार काम करते। संविधान में कहां लिखा है कि किसी इंसान का शव उसके परिवार के सदस्यों की बिना मौजूदगी के जबरन ले जाकर अंतिम संस्कार कर दिया जाए। इसका परिणाम सरकार को भुगतना पड़ेगा।
- चीनू ने कहा कि मेरे पिता नहीं रहे, मेरे परिवार को भूखा रखा, सब्जी तक नहीं ले जाने दी गई। मुझे भारत नहीं आने दिया गया। हमें न्याय नहीं मिला मैं भी आत्मदाह कर लूंगी।
पेशी के दौरान भागा था, बेटी की भूमिका भी संदिग्ध
3 सितंबर 2015 को अजमेर पुलिस आनंदपाल को नागौर के लाडनूं में पेशी पर लेकर आई थी। पेशी से लौटते समय योजना के अनुसार परबतसर के पास बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी और आनंदपाल, श्रीवल्लभ व सुभाष मूंड को छुड़ाकर ले गए। आनंदपाल पुलिस की एक एके-47 भी अपने साथ ले गया था। एसओजी ने आनंदपाल की बेटी की भूमिका को भी संदिग्ध माना था।
एसओजी आनंदपाल की बेटी को भी गिरफ्तार कर सकती है। आनंदपाल की बेटी ने जीवनराम गोदाराम हत्याकांड के गवाहों को मैनेज करने के लिए अपने पिता के साथ मिलकर फरारी की रणनीति बनाई थी। इसके बाद वह महेन्द्र सिंह व केसर सिंह के माध्यम से कमांडो शक्ति सिंह से मिली थी। इसके बाद आनंदपाल की गैंग के सदस्यों ने योजना बनाई थी।
आनंदपाल की पत्नी राजकंवर ने दैनिक भास्कर को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि वे गंदी राजनीति की वजह से अपराध की दुनिया में फंस गए थे। वो डेयरी चलाते थे। 80 गाय-भैंसें थीं। आम आदमी की तरह जिंदगी जीते थे। गंदे राजनेताओं ने ऐसा तोड़ा कि वे इस दलदल में घुस गए, सबका जीवन खराब हो गया। आनंदपाल की अपनी पत्नी से अंतिम मुलाकात 23 अगस्त, 2013 को हुई थी।
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