कभी क्रिकेट छोड़ ट्रक ड्राइवर बनने वाले थे भज्जी, गांगुली ने बदल दी किस्मत
3 जुलाई (1980) को 37 साल के हुए इंडियन क्रिकेटर हरभजन सिंह कभी घर चलाने के लिए क्रिकेट छोड़ने का मन बना चुके थे। ऐसा उन्होंने फैमिली प्रॉब्लम के चलते किया था। इस बारे में उनके साथी क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने ट्वीट किया। हालांकि, कुछ साल बाद सौरव गांगुली के कहने पर भज्जी की टीम इंडिया में वापसी हो गई थी। इसलिए ड्राइवर बनना चाहते थे हरभजन
- हरभजन सिंह ने 1998 में इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू किया था। करीब 1.5 साल तक खेलने के बाद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। कुंबले तब टीम इंडिया के स्टार स्पिनर थे। उनके चोटिल होने के बाद भी भज्जी की जगह दूसरे खिलाड़ियों को मौका मिल रहा था। इससे वो निराश हो गए थे।
- इसी बीच साल 2000 में भज्जी के पिता का निधन हो गया। अब वो ही परिवार में अकेले कमाने वाले शख्स थे। भज्जी पर मां और 5 बहनों की जिम्मेदारी थी। टीम में वापसी नहीं होने के कारण वो क्रिकेट छोड़ने का सोच चुके थे। भज्जी ने कनाडा जाकर ट्रक ड्राइवर बनना तय किया, ताकि वो अपना घर चला सकें। हालांकि, इसी बीच रणजी ट्रॉफी में खेलते हुए उन्होंने 28 विकेट झटके और पंजाब को जीत दिलाई थी।
- 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत की अहम घरेलू टेस्ट सीरीज से पहले कुंबले चोटिल हो गए थे। यहीं से हरभजन की किस्मत बदली। तब सौरव गांगुली के कहने पर हरभजन की टीम में वापसी हुई। ये सीरीज उनके लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। पहले टेस्ट में उन्होंने 4 विकेट लिए। वहीं, दूसरे और तीसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलियाई बैट्समैन भज्जी की घूमती बॉल के आगे टिक नहीं सके। भज्जी ने दूसरे टेस्ट में 13 और तीसरे टेस्ट में 15 विकेट झटककर टीम इंडिया में अपनी जगह फिक्स कर ली थी। यहीं से उन्हें टर्बोनेटर नाम मिला था।
करीब 2 साल रहे टीम से बाहर
- हरभजन सिंह ने 25 मार्च, 1998 को टेस्ट डेब्यू किया था। 29 अक्टूबर, 1999 को न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट मैच के बाद उन्हें टीम से ड्रॉप कर दिया गया था। इसके बाद उनकी वापसी 27 फरवरी, 2001 को हुई।
- वहीं, भज्जी ने 17 अप्रैल, 1998 को वनडे डेब्यू किया। इसी साल 30 सितंबर को जिम्बॉब्वे के खिलाफ वनडे के बाद उन्हें टीम से बाहर कर दिया। करीब 3 साल बाद 25 मार्च, 2001 में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे वापसी की।


Post a Comment