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इजरायल-फिलिस्तीन की कट्टर दुश्मनी, ये हैं इनके चर्चित किस्से


नरेंद्र मोदी दो दिवसीय इजरायल की यात्रा पर हैं। इजरायल जाने वाले मोदी भारत के पहले पीएम हैं। दरअसल, इजरायल और फिलिस्तीन के विवाद के चलते दुनिया के कई देशों के लीडर्स इजरायल जाने से बचते हैं। क्योंकि इजरायल एक यहूदी देश है और फिलिस्तीन मुस्लिम। फिलिस्तीन को पाकिस्तान, सऊदी अरब समेत कई मुस्लिम देशों का सपोर्ट है और वे इजरायल को दुश्मन देश मानते हैं। इजरायल और फिलिस्तीन के बीच इजरायल के गठन (1948) से ही विवाद चला आ रहा है। दोनों देशों के बीच जंग आम बात हो चुकी है। इसी सिलसिले में आज हम आपको इनके विवाद कुछ ऐसे किस्से बता रहे हैं, जो दुनिया भर की मीडिया की सुर्खियों में रहे।

इजरायली बच्चों का मैसेज
जुलाई 2006 में इजरायल की फिलिस्तीन और लेबनान के बीच जंग छिड़ी थी। इस दौरान इजरायली बच्चों की फोटोज वायरल हुई थीं। इन रॉकेट्स पर बच्चे दुश्मन देशों के लिए मैसेज लिखते नजर आए थे। मैसेज में लिखा था 'इजरायल का गिफ्ट'। इस जंग में लेबनान के 1200 से अधिक नागरिक मारे गए थे। दो हफ्तों तक चली इस जंग में इजरायल ने फिलिस्तीन और लेबनान में जबर्दस्त तरीके से बमबारी की थी।

फिलिस्तीन की बर्बादी का नजारा देखते इजरायली
जुलाई 2014 में हमास के रॉकेट हमलों के बाद इजरायल ने जवाबी कार्रवाई करते हुए गाजा पट्टी पर अंधाधुंध बम बरसाए थे। इस दौरान इजरायल के लोग फिलिस्तीन पर गिराए जा रहे बमों का नजारा देखने ऊंचे टीले पर जमा थे। इस दौरान ऐसी कई फोटोज मीडिया में जबर्दस्त तरीके से वायरल हुई थीं।

दो हफ्तो की जंग में मारे गए थे सैकड़ों लोग
जुलाई 2014 में फिलिस्तीन के विद्रोही गुट हमास ने इजरायल की आर्मी पर कई रॉकेट दागे थे, जिसके चलते दोनों देशों के बीच जंग छिड़ गई थी। दो हफ्तों तक चली इस जंग में फिलिस्तीन के 500 से अधिक नागरिक मारे गए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। वहीं, इजरायल के 27 सोल्जर्स और 25 आम नागरिक मारे गए थे।

इजरायल की बॉर्डर वॉल
फिलीस्तीन का विद्रोही गुट हमास के आतंकी अक्सर इजरायल में घुसकर आतंकी वारदात को अंजाम देते रहते हैं। इसके चलते इजरायल ने फिलिस्तीन से लगी अपनी बॉर्डर को सेंसर वाली 438 किमी लंबी दीवार से लैस किया। दीवार का निर्माण कार्य 2000 से शुरू होकर 2006 में कंम्पलीट हुआ। इस दौरान इजरायल और हमास के लड़ाकों के बीच कई बार हिंसक झड़प हुई। इजरायल की जवाबी कार्रवाई में सैकड़ों फिलिस्तीनी मारे गए। सऊदी अरब, जॉर्डन, ईरान, इराक समेत कई मुस्लिम देशों ने इजरायल की इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई। बता दें इस दीवार निर्माण में दो बिलियन डॉलर यानी आज के हिसाब से 13,354 करोड़ रुपए लगे हैं। इस दीवार की लंबाई 700 किमी और ऊंचाई 10 मीटर है। दीवार के बीच में हर एक किमी पर दो आर्मी पोस्ट हैं, जिस पर से आर्मी फिलिस्तीन पर नजर रखती है।

इजरायली आर्मी ने फिलिस्तीन के प्रेसिडेंट को उनके ही मुख्यालय में कर दिया था नजरबंद
एक्स प्रेसिडेंट स्व. यासिर अराफात फिलिस्तीनी मुक्ति संगठन के अध्यक्ष भी थे। अराफात इजरायल से कट्टर दुश्मनों में से एक थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल की खुफिया एजेंसी ‘मोसाद’ ने अराफात को मारने की कई बार कोशिश की थी। वहीं, 2001 में इजरायल के प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन के निर्देश पर इजरायली आर्मी ने रमल्ला में अराफात के मुख्यालय की घेराबंदी कर दी थी। इस दौरान इजराइली टैंकों ने रमल्ला में बहुत सी इमारतों को भी ध्वस्त कर दिया था और अराफात को भी उनके ही मुख्यालय में नजरबंद कर दिया था।