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टेढ़ा खड़ा है यह रहस्यमयी शिव मंदिर, ऐसे 7 टेम्पल जो हो जाते हैं अंडरवॉटर


गंगा का जलस्तर प्रति घंटे 3 सेमी की रफ़्तार से बढ़ रहा है। कई घाटों के संपर्क टूटने की स्थिति बन रही है। घाटों के सीढ़ियों पर निर्मित कई मंदिर डूब गए हैं। यहीं बने रत्नेश्वर महादेव मंदिर के डूबने के पीछे की कहानी थोड़ी अलग है। स्थानीय लोगों का मानना है- एक मां के श्राप से मंदिर न सिर्फ टेढ़ा है, बल्कि साल के 4 महीनों तक पानी में डूबा भी रहता है।

तीर्थ पुरोहित भुवनेश्वर मिश्रा बताते हैं - 15वीं शताब्दी में मान सिंह के सेवक ने अपनी मां रत्ना के लिए मंदिर बनवाया था। निर्माण के बाद जब सेवक अपनी मां को मंदिर दिखाने ले गया तो उसने कहा- मां मैंने तेरे लिए मंदिर बनवाया है। इसके साथ ही तेरे दूध का कर्ज चुकता हुआ। ऐसा कहा जाता है कि रत्ना की नजर पहले जहां पड़ी, वहीं से मंदिर टेढ़ा हो गया। प्रचलित कथाओं के मुताबिक मां रत्ना ने बेटे को जवाब दिया था- बेटा, तूने बुरी नीयत से इस मंदिर का निर्माण करवाया। मां के दूध का कर्ज कोई किसी जन्म में चुकता नहीं कर सकता। मेरा श्राप है कि इस मंदिर में कोई कभी पूजन नहीं कर पाएगा। यहां साल के अधिकतर समय गंगा वास करेंगी, इस वजह से कोई अंदर नहीं जा पाएगा।


गंगा किनारे जलस्तर बढ़ने पर सबसे पहले रत्नेश्वर महादेव का मंदिर जलमग्न होता है। यही नहीं, यह अपने टेढ़े ढांचे की वजह से भी चर्चाओं में रहता है। भुवनेश्वर मिश्रा बताते हैं -यहां कुछ ब्रिटिश रिसर्चर भी शोध करने आए थे। वे भी मंदिर के टेढ़े होने की वजह नहीं बता सके। यह आज भी रिसर्च का टॉपिक बना हुआ है। - प्रेजेंट में यहां शिव भक्त गर्भ गृह में पूजन के लिए जाते तो हैं, लेकिन अन्य मंदिरों की तरह कभी इसकी साफ-सफाई नहीं हो पाती। यहां हमेशा गंदगी फैली रहती है।


स्तंबेश्वर महादेव मंदिर - वडोदरा से 40 मील दूर अरब सागर के तट पर बना है यह मंदिर। हाई टाइड्स के दौरान पूरी तरह जलमग्न हो जाता है।


मनसबल ताल में बना 8वीं सदी का शिव मंदिर - श्रीनगर से 32 किमी दूर कश्मीर स्थित मनसबल ताल में 8वीं सदी का शिव मंदिर है। यह मंदिर ताल में आधा डूबा रहता है। अंदर स्थापित शिवलिंग एक फुट ऊंचा है। 2007 में इसे वुल्लार-मनसबल डेवलपमेंट अथॉरिटी ने संरक्षित करवाया और उसे एक टूरिस्ट स्पॉट के रूप में डेवलप किया।


गोबिंद सागर के मंदिर - हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में गोबिंद सागर ताल के बीच बने ये मंदिर महाभारत काल के हैं। ऐसा कहा जाता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडव यहां आकर रुके थे। बारिश के मौसम में ये पूरी तरह जलमग्न हो जाते हैं। अन्य सीजन में भी ये आधे ही नजर आते हैं।


पोंग डैम के जलमग्न मंदिर - हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में पोंग डैम के निर्माण से कई पौराणिक मंदिर जलमग्न हुए। उन्हीं में शुमार हैं 'बाथू की लड़ी'। ये 9 मंदिरों की श्रृंखला है। ये महाराणा प्रताप सागर में जलमग्न हो जाते हैं।


बाली का अंडरवॉटर टेम्पल गार्डेन - इंडोनेशियन आइलैंड बाली के पेमुटेरन गांव में बना है यह मंदिरों का अंडरवॉटर गार्डेन। इसे 2005 में एन्वायरन्मेंट कंजर्वेशन प्रोग्राम के तहत बनवाया गया था। यहां भगवान बुद्ध, विष्णु, गणेश और शिव की मूर्तियां जलमग्न हैं। यहां जाने के लिए टूरिस्ट्स को अंडरवॉटर डाइविंग की ट्रेनिंग लेना जरूरी है।


बोधी वृक्ष - थाइलैंड की प्राचीन राजधानी रहे अयुथाया में बना है वात महाथाट मंदिर। इस मंदिर के हजारों साल पुराने बोधी वृक्ष की जड़ में भगवान बुद्ध की प्रतिमा स्थापित है। 2011 में आई बाढ़ में यह मूर्ति कुछ इस प्रकार से डूब गई थी। सामान्य कंडीशन्स में यह एरिया पूरी तरह सूखा रहता है (इनसेट में)।