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बंदूकधारी गार्ड की मौजूदगी में उतरा टमाटर, अब 24 घंटे हो रही है पहरेदारी


समय बदलते देर नहीं लगती, समय राजा को रंक और रंक को राजा बना देता है, इंदौर की सब्जी मंडी में शनिवार को ऐसा ही नजारा दिखा। कभी चार आने किलो के दाम में बिके टमाटर की पहरेदारी दिन भर बंदूकधारी गार्ड्स करते रहे।
 गार्ड्स की व्यवस्था किसानों और व्यापारियों के आग्रह पर मंडी समिति ने की थी। ऐसा टमाटर के आसमान छूते दामों के चलते हुआ है। यहां अब 24 घंटे टमाटर बंदूकधारी गार्ड्स की निगरानी में रहेंगे। क्या है पूरा मामला...

कभी थोक में चार आने किलो में बिकने वाले टमाटर अब के दाम अब आसमान छू रहे हैं। थोक में टमाटर 60 से लेकर 80 रु किलो हैं, जबकि खेरची में सौ से सवा सौ रुपए किलो बिक रहा है। टमाटर के दाम आम लोगों के साथ-साथ किसानों और व्यापारियों लिए भी परेशानी का सबब बन गए हैं।

- थोक व्यापारी सुभाष नारंग बताते हैं कि कुछ दिनों पहले मुंबई में गुंडों ने टमाटर व्यापारियों को निशाना बनाकर टमाटर की गाड़ियां लूट ली थी। इसके बाद किसान और व्यापारी डरे हुए हैं। शनिवार को मंडी में टमाटर की गाड़ी लाने के पहले कुछ किसानों ने मंडी समिति से सुरक्षा की मांग की।

- ये सुन एक बार तो मंडी के अधिकारी भी चौंक गए, लेकिन फिर किसानों के मुद्दे पर देशभर में चल रहे माहौल को देखते हुए उन्होंने तुरंत अपने बंदूकधारी गार्ड को टमाटर की गाड़ियों की सुरक्षा के लिए रवाना कर दिया।
- मंडी में आने से फुटकर ग्राहकों के बैग में जाने के बीच टमाटर को लगातार वीआईपी स्टेटस दिया गया।

गाड़ियों के मंडी में आने से लेकर माल बिकने तक हर गाड़ी के आसपास तीन से चार गार्ड्स अपनी बंदूक लेकर तैनात रहे। मंडी समिति के मुताबिक़ वैसे इंदौर में कहीं कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है, लेकिन यदि आगे भी किसानों या व्यापारियों ने सुरक्षा की मांग की तो हम उन्हें गार्ड उपलब्ध कराएंगे।

- मंडी इंस्पेक्टर रमेश सावादिया ने बताया कि टमाटर के दाम 10 गुना बढ़ गए हैं, जबकि आवक पहले से 10 प्रतिशत ही रह गई है। ऐसे में कुछ किसानों ने मुंबई की घटना का हवाला देते हुए हमसे सुरक्षा व्यवस्था की मांग की थी तो हमने उन्हें गार्ड उपलब्ध करवा दिए हैं।

सड़क पर फेंक गए थे किसान
- जिस टमाटर की सुरक्षा अभी बंदूकधारी जवान कर रहे हैं, तीन महीन पहले उसके हाल बेहाल थे। तीन महीने पहले थोक में टमाटर के दाम चार आने से लेकर एक रुपए किलो हो गए थे। तब टमाटर बेचने आए कई किसान अपना माल सड़क पर फेंककर चले गए थे,
 क्योंकि टमाटर बेचने से मिले रुपए गाड़ी के भाड़े से भी कम थे।