चातुर्मास 4 से, चार महीने पाताल में रहेंगे भगवान विष्णु
हिंदू धर्म के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल एकादशी (4 जुलाई, मंगलवार) से कार्तिक शुक्ल एकादशी (31 अक्टूबर, मंगलवार) तक के समय को चातुर्मास कहते हैं। हिंदू धर्म में इसका विशेष महत्व है। इस दौरान धार्मिक गतिविधियों पर विशेष जोर दिया जाता है साथ ही चातुर्मास के अपने कुछ खास नियम भी हमारे धर्म ग्रंथों में बताए गए हैं। एक धार्मिक मान्यता ये भी है कि चातुर्मास में भगवान विष्णु पाताल में निवास करते हैं। इससे संबंधित पूरी कथा इस प्रकार है-
क्यों चातुर्मास में पाताल में निवास करते हैं भगवान विष्णु?
भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर दैत्यों के राज बलि से तीन पग धरती दान में मांगी। बलि दानवीर था, उसने दान देना स्वीकार किया। भगवान ने पहले पग में पृथ्वी व सभी दिशाएं और दूसरे पैर से स्वर्ग लोक नाप लिया। जब बलि ने देखा कि उसका वचन पूरा नहीं हो पा रहा है तो उसने वामन भगवान से तीसरा पग उसके सिर पर रखने को कहा। बलि की दानवीरता देखकर भगवान ने उसे पाताल लोक का राजा बना दिया और वर मांगने के लिए कहा। बलि ने भगवान से कहा कि आप मेरे साथ पाताल में निवास करें। तब भगवान ने बलि की भक्ति को देखते हुए चातुर्मास में पाताल में रहने का वरदान दिया। इसी मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी से देवप्रबोधिनी एकादशी तक पाताल में बलि के महल में निवास करते हैं।


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