कानपुर में गंगा का बुरा हाल, 20 किमी के दायरे में 23 छोटे-बड़े नाले-किनारों पर फैला कूड़ा
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने हरिद्वार से उन्नाव तक गंगा के किनारों से सटा 100 मीटर तक का इलाका नो डेवलपमेंट जोन घोषित कर दिया है। NGT ने कहा है कि इस इलाके में (हरिद्वार से उन्नाव तक) गंगा के किनारों से 500 मीटर तक किसी भी तरह का कचरा नहीं फेंक सकते। इस फैसले के बाद कानपुर में गंगा की स्थिति जानी तो सामने आया कि यहां गंगा नदी की स्थिति भयावह बनी हुई है। यहां बैराज से जाजमऊ तक गंगा नदी में 23 छोटे बड़े नाले गिरते हैं। वहीं गंगा के किनारे कूड़े का ढेर लगा रहता है।
पड़ताल में सामने आया कि कानपुर में गंगा किनारे बना कोई भी घाट ऐसा नहीं है जहां गंदगी का अम्बार न फैला हो। बैराज के बाद रानीघाट, भैरोघाट, परमटघाट, अस्पताल रोड, सरसैयाघाट, बाबाघाट, बुढ़ियाघाट, शीरलाघाट, सिद्धनाथघाट के किनारे सौ मीटर के दायरे में ही अवैध निर्माण हुए है।
- गंगा किनारे बने इन घरों का गंदा पानी नालियों से सीधे गंगा में गिराया जाता है। साथ ही इस इलाके के बड़े नाले भी गंगा नदी में सीधे गिर रहे हैं।
- इसके अलावा गंगा किनारे पुरुषों के लिए कोई शौचालय नहीं है, जबकि महिलाओं के शौचालय टूटे-फूटे पड़े हैं।
कानपुर में गंगा नदी सबसे ज्यादा प्रदूषित
- बीते महाकुम्भ मेले से पहले कानपुर जलसंस्थान के एक सर्वे में कानपुर में गंगा का पानी सबसे ज्यादा प्रदूषित पाया गया था।
- रिपोर्ट के मुताबिक, 100 मिली लीटर गंगा जल में करीब 24 लाख कॉलिफोर्म वैक्टीरिया पाए गए थे, जो कि स्टैंडर्ड वैल्यू से 48 गुना ज्यादा था ।
- इसके अलावा इस नमूने में स्टैंडर्ड वैल्यू से दोगुना जहरीला कैमिकल नाइट्राट पाया गया था।
- एक लीटर गंगा जल में करीब 0.02 मिलीग्राम जहरीला नाइट्राट पाया गया जो कि स्टैंडर्ड वैल्यू से कहीं ज्यादा है। जबकि पानी में नाइट्राट की मात्रा शून्य होनी चाहिए।
- गंगा जल में नाइट्राट बढ़ने की वजह से कानपुर में कुल 23 छोटे बड़े नालों के जरिए पुरे शहर और ग्रामीण इलाके का घरेलु कचरा और करीब 400 टेनरियों का दूषित जल गंगा नदी में प्रवाहित किया जाना माना गया।
- रिपोर्ट के मुताबिक़ करीब 30 करोड़ लीटर प्रदूषित पानी रोज़ाना गंगा नदी में डिस्चार्ज होता है। वहीं, जल निगम द्वारा स्थापित किया गया वाटर ट्रीटमेंट प्लांट 17 करोड़ लीटर प्रदूषित पानी को ही एक दिन में ट्रीट कर सकता है।
- ऐसे में 13 करोड़ लीटर के आसपास प्रदूषित पानी सीधे गंगा नदी में प्रवाहित हो रही है। जिसकी वजह से कानपुर में गंगा का पानी सबसे ज्यादा प्रदूषित माना जाता है।


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