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अजीब रीति रिवाज, परम्परा के नाम पर काट दी जाती है, महिलाओं की उंगलियां !!


दुनिया में अजीब अजीब परंपरा हैं। कहीं शादी को लेकर तो कहीं किसी और बात को लेकर। कुछ परंपराएं ऐसी होती हैं जिन के बारे में सुन कर ही हमें हैरानी होने लगती है की ऐसा भी हो सकता है दुनिया में। लोग इतने निर्दयी हो सकते हैं। दुनिया में हर जाति और जनजाति की परंपराएं एक दूसरे से अलग होती हैं। लेकिन कुछ परंपराएं बेहद निर्दयी भी होती हैं। एक ऐसी ही परंपरा के बारे में हम बात कर रहे हैं।

आज भी इन जनजातियों के यहां सालों से चली आ रही परंपराओं और प्रथाओं का पालन किया जाता है। ऐसी ही एक अजीबोगरीब लेकिन दर्दनाक प्रथा का पालन इंडोनेशिया के पापुआ में रहने वाले दानी जनजाति के लोग करते हैं, जिसके बारे में सुनकर हर कोई हैरान हो सकता है।

इंडोनेशिया के पापुआ गिनी द्वीप पर रहने वाली दानी जनजाति के लोग दुनिया की सबसे दर्दनाक और क्रूर परंपरा निभाने के लिए मशहूर हैं। इस कबीले में ऐसी कई औरतें हैं जिनकी एक दो नहीं बल्कि कई उंगलियां काट दी गई हैं। कई बुजुर्ग औरतें तो अपने हाथों की सारी उंगलियां गंवा चुकी हैं।

इस जनजाति में परिवार के मुखिया की मौत पर फैमिली के महिला सदस्यों की उंगलिया कुल्हाड़ी से काट दी जाती है। इतना ही नहीं, इनके चेहरों पर मिट्टी और राख भी पोती जाती है।

इस परंपरा के अनुसार दानी जनजाति में परिवार के मुखिया की मौत का शोक जताने के लिए परिवार की महिलाओ की उंगलियां वो भी दोनो हाथों की काट दी जाती थीं। यहां के लोगों के अनुसार ये दर्दनाक होता है, लेकिन इससे मरने वाले की आत्मा को शांति मिलती है। लेकिन इस दौरान महिलाओं के साथ जो होता था उससे किसी की भी रूह कांप जाऐ।

दानी कबीला पापुआ गिनी के तहत आता है और यहां करीब ढाई लाख आदिवासी रहते हैं। इस परंपरा के पीछे का तर्क है कि औरत के द्वारा उंगली का दान देने पर मरने वाला शख्स भूत बनकर परिवार को नहीं सताएगा।

परंपरा के अनुसार दानी जनजाति में किसी परिवार के सदस्य की मौत पर उस परिवार की महिला की उंगलियों को काट दिया जाता है। इस अजीब परम्परा के चलते यहां कई महिलाओं के हाथों से पूरी अंगुलियां ही गायब हो चुकी है और यह दर्दनाक कार्य भी उसी परिवार के सदस्य को करना पडता है।

बताया जाता है कि उंगलियां काटने से पहले उनको धागे से 30 मिनट बांधकर रखा जाता है। इसके बाद काटी गई उंगलियों को सूखाकर जलाया जाता है। हालांकि, सरकार ने कुछ साल पहले इस परंपरा पर बैन लगा दिया, लेकिन फिर भी दानी जनजाति के लोग इसे निभाते हैं।