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40 साल बाद भारत लौटा सफेद शेर, देखो तो कैसे जीभ चिढ़ा रहा है


कभी विध्ंयाचल के गौरव और पहचान रहे सफेद शेर की वापसी मुंकदपुर सतना में होने से विंध्याचल के लोगों की तपस्या सफल हो गयी।

विंध्य ने ही दुनियां को सफेद शेरों की विरासत सौपी थी। विश्व में सफेद शेरों को लेकर वन्य प्राणी प्रेमियों में अलग रोमांच है। रीवा के तत्कालीन राजा मार्तन्ड ने सफेद शेरों की खोज की थी। अपनी खौज को राजा ने मोहन नाम दिया था। दुनियां में आज जितने भी सफेद शेर है। वे सब मोहन के ही वंशज माने जाते है।

विंध्य को सफेद शेरों से आबाद करने का बीडा जनसम्पर्क मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने उठाया था। शुक्ल की तपस्या को साकार करने  केंन्द्रिय मंत्री जावडेकर, नरेंद्र सिंह तोमर, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान, वन मंत्री गौरी शंकर शेजवार, विधानसभा उपाध्यक्ष राजेंद्र कुमार सिंह सहित अनेक जन प्रतितिधि टायगर सफारी मुंकदपुर में जुटे थे।

सफारी 40 साल के लंबे इंतजार के बाद मोहन के वंशज से फिर से पर्यटकों को लुभाएगी और रोमांचित करेगी। सभी अथितियों ने सफारी का पर्यावरण सफेद शेरों के मुफिद बनाएं रखने और अन्य प्रजातियों के वन्य प्राणियों को संरक्षण योग्य बनाएं रखने पर जौर दिया।

पिछले 07 सालों में विभिन्न कारणों से हो चुकी 100 के लगभग शेरों के मौत पर भी रंज प्रकट करते हुए वन अमले को सचेत, सक्रिय रहने की हिदायते दी।