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फ्रेंड को 400 फीट गहरी खाई से निकाला जिंदा, धक्का दिया फिर मारने फेंके थे पत्थर


.400 फीट गहरी खाई से मौत को मात देकर पांच दिन बाद जिंदा लौटे बीएससी के छात्र मृदुल भल्ला को उसके दोस्त और परिचितों के कारण ही बचाया जा सका है। पुलिस चाहती तो वह दो दिन में ही मिल जाता, लेकिन परेदशीपुरा पुलिस की लापरवाही के कारण पांच दिन तक वह जंगल में ही पड़ा रहा। इसका खुलासा उसके दोस्त व रिश्तेदारों ने किया है। वहीं परदेशीपुरा पुलिस की लापरवाही की जानकारी जब डीआईजी को लगी तो उन्होंने टीम को 20 हजार रुपए का जो इनाम घोषित किया था, उसे रद्द कर दिया।




- मृदुल का पता नहीं चलने पर उसके रूम मेट सौरभ और बृजेश पहले परदेशीपुरा थाने गए थे। उस समय टीआई राजीव त्रिपाठी ने उन्हें यह कहकर लौटा दिया था कि ऐसे रोज 100 केस आते हैं। पुलिस हर गुमशुदा की तलाश में एकदम नहीं निकलती। इसके बाद मैं भी सौरभ और बृजेश के साथ मृदुल की तलाश में जुट गया।

- हमें पहला सुराग एक शो-रूम के सीसीटीवी कैमरे में मिला। यहां मृदुल किसी से फोन पर बात करते हुए सड़क पर घूमता दिखा। फिर कैमरे की जद से बाहर हो गया।

- आगे एक सैलून पर फुटेज देखने गए तो संचालक ने बताया कि रविवार को एक लड़के को कुछ युवक कार में जबरदस्ती ले गए। उसने फुटेज दिखाए तो अपहरण का खुलासा हुआ। मृदुल बचाओ-बचाओ चिल्ला रहा था। कुछ व्यापारी व राहगीर कार के पीछे भी दौड़े। फुटेज देखने के बाद उन्होंने टीआई को अपहरण की जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम भेज दिया। जहां आरएलवीडी कैमरों में हम कार के फुटेज व नंबर सर्च करते रहे।

- कार परदेशीपुरा से अटल द्वार, पलासिया चौराहा होकर जाती दिखी। उसका नंबर ट्रेस किया और मालिक के पते की जानकारी निकाली। इसके बावजूद एक दिन तक पुलिस किसी को नहीं लाई। अगले दिन मैं खुद अपनी कार में

- एक पुलिसकर्मी को लेकर आरोपी आकाश के पते पर पहुंचा। उसने गुरुवार को हत्या की बात कबूली। हमने मौके पर चलने को कहा तो पुलिस आरोपी आकाश और उसके साथियों को मुआरा घाट ले गई। उस समय अंधेरा हो गया था।

- पुलिस से सर्चिंग करने को कहा तो उन्होंने कहा हमारे पास टॉर्च नहीं है। आपको खरीदकर लाना होगा। अगले दिन सुबह सर्च आॅपरेशन में ग्रामीण व कंपेल पुलिस नीचे उतरी तो मृदुल जिंदा मिला।