पतंग उड़ाने यहां किराए पर मिल रही छत, एक दिन का किराया १२, से 15 हजार रुपए
मकर संक्रांति त्योहार की तमाम पुख्ता पहचानों में से एक है पतंगबाजी। संक्रांति पर पतंगबाजी का पुराना कल्चर भी अब कमर्शियल हो गया है। खासकर गुजरात में। पुराने अहमदाबाद में पतंग उड़ाने के लिए छत किराए पर मिल रही है। वो लोग, जो फ्लैट वगैरह में रहते हैं या जिनके घरों की छत पर पतंगबाजी के लिए ठीक-ठाक जगह नहीं है, वो इस सुविधा का इस्तेमाल कर रहे हैं। जिनके पास बड़ी छत है, वो दूसरों से किराया लेकर उन्हें अपनी छत पर पतंग उड़ाने की इजाजत दे रहे हैं। छत का एक दिन का किराया १२, से 15 हजार रुपए है।
- किराए के साथ लोगों को किसी एक परिचित का रेफरेंस भी देना होता है, तभी छत मिलेगी। साथ में छत मालिक 10 कुर्सी देते हैं और वॉशरूम इस्तेमाल करने की सुविधा। बस और कुछ नहीं।
- अहमदाबाद के नीरव मोदी बताते हैं कि- "पुराने अहमदाबाद का कमर्शियल डेवलेपमेंट होने के बाद लोग यहां से निकलकर शहर के अलग-अलग हिस्सों में जा बसे। इसके बाद भी वो पुराने अहमदाबाद में ही पतंगबाजी के लिए आते हैं। किसी परिचित की छत पर पतंग उड़ाने जाओ तो संकोच लगता है। इस वजह से धीरे-धीरे चलन बना कि कई लोग ग्रुप बना कर छतें किराए पर लेंगे और वहां से पतंगबाजी करेंगे। पैसा देने के बाद छत पर हक का भाव रहता है।"
देश भर में इस साल पतंग का कारोबार ६२५, से 630 करोड़ रुपए तक का हो सकता है। ये पिछले साल से करीब 2.5% अधिक है। इस पूरे कारोबार में अकेले अहमदाबाद का ही योगदान ४५, से 50 करोड़ रुपए होने का अनुमान है।
संक्रांति सिर्फ भारत में ही नहीं, पड़ोसी देशों में भी मनाई जाती है। पाकिस्तान की सिंधी कम्युनिटी तो हमारी तरह ही मकर संक्रांति मनाती है। वो भी इस दिन तिल के लड्डू खाते हैं और पतंग उड़ाते हैं।
वहीं नेपाल में इसे माघे संक्रांति के नाम से मनाते हैं। नेपाल में इस दिन पवित्र बागमती नदी में नहाकर सूर्य की पूजा करने का रिवाज है। बांग्लादेश में भी 14 जनवरी को शक्रेन नाम से त्योहार मनाते हैं। पतंगबाजी का चलन दोनों देशों में है।

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