उड़द और घास की रोटी खाने को विवश बुंदेलखंड के गरीब
टीकमगढ़: बुंदेलखंड में इस वर्ष सूखे की मार है। यहां के गरीबों को 2 जून की सूखी रोटी भी नसीब नहीं हो पा रही है। वही सार्वजनिक वितरण प्रणाली का अनाज भी इन गरीबों को नहीं मिल रहा है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अनाज से राशन दुकानदार और नेता मिलकर जरूर अपना पेट भर रहे हैं। किंतु गरीब का पेट खाली हैं।
कलेक्टर की जनसुनवाई के दौरान दर्जनों महिलाओं ने कलेक्टर को उड़द और घास से बनी हुई रोटी अधिकारियों को दिखाई। उन्होंने कहा कि भूख के कारण एक महिला की मौत हो जाने के बाद भी, सार्वजनिक वितरण प्रणाली से उन्हें अनाज नहीं मिल रहा है।
जनसुनवाई में कलेक्टर ने इस स्थिति को समझा, और जिला प्रशासन के अधिकारियों को मामले की जांच करने का आदेश दिया। उल्लेखनीय है मवई के छीपोंन बाबा खिरक में एक आदिवासी महिला नन्ही बाई की मौत भूख से होने की बात परिजनों ने कही थी। महिलाओं ने इसकी शिकायत केंद्रीय राज्य मंत्री ,महिला बाल विकास और टीकमगढ़ के सांसद वीरेंद्र खटीक से भी की है। उन्होंने ग्राम वासियों को आश्वासन दिया है, कि वह 27 तारीख को जब टीकमगढ़ आएंगे।
तब इस मामले की जांच कराएंगे। शिकायत लिखकर उनके टीकमगढ़ ऑफिस में जमा कर दें। बहरहाल बुंदेलखंड की हालत इन दिनों बहुत खराब है। किंतु शासन एवं प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार और मनमानी के कारण यहां के गरीब भूख के कारण जान देने के लिए विवश हो रहे हैं।

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