राजघराने से जुड़े हैं ये MLA, खाते हैं मिट्टी के चूल्हे पर बना खाना
रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने 31 अक्टूबर को बर्थडे सेलिब्रेट किया। इस मौके पर जानिए उनसे जुड़े अनसुने फैक्ट्स।
यूपी की राजनीति में अलग पहचान रखने वाले रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने 31 अक्टूबर को बर्थडे सेलिब्रेट किया। इस मौके पर नेक्सा news ने राजा भैया और उनके खास करीबियों से बात की। इस बातचीत में उन्होंने अब तक की कई अनसुनी बातें शेयर की।
भदरी रियासत के राजकुमार रघुराज प्रताप सिंह "राजा भैया" का जन्म 31 अक्टूबर 1967 को प्रतापगढ़ के कुंडा में हुआ था। इसी क्षेत्र से वे विधायक भी हैं।
- अखिलेश सरकार में मंत्री रहे राजा भैया के पिता उदय प्रताप सिंह अपनी कट्टर हिंदू छवि के लिए जाने जाते हैं। राजा भैया के दादा बजरंग बहादुर सिंह हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रहे।
- राजा भैया ने लखनऊ यूनिवर्सिटी से लॉ में ग्रैजुएशन किया है। इसी यूनिवर्सिटी से इन्होंने मिलिट्री साइंस और इंडियन मेडिवल हिस्ट्री में ग्रैजुएशन की डिग्री भी ली है।
- राजा भैया बताते हैं, "हम चाहे कुंडा में बनी बेंती कोठी में रहें या लखनऊ के सरकारी आवास में, हमारा खाना सिर्फ मिट्टी के चूल्हे पर पकता है। मुझे सिर्फ उसी का स्वाद पसंद है।"
- इनके करीबी डॉ. कैलाश नाथ ओझा बताते हैं, "इन्होंने लखनऊ में मिले सरकारी आवास में भी मिट्टी का चूल्हा बनवाया है। रोटी से लेकर दाल-सब्जी तक मिट्टी के चूल्हे पर ही बनती है।"
- राजा भैया नॉनवेज के खास शौकीन हैं। इसके लिए उन्होंने स्पेशियली मिट्टी के बर्तन रखे हैं जो मिट्टी के चूल्हे पर चढ़ते हैं।
राजा भैया के चचेरे भाई व प्रतापगढ़ के एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह बताते हैं, "जब राजा भैया पढ़ाई पूरी कर कुंडा आए तो उस समय राजनीति में इनका कोई दखल नहीं था। इनके पास क्षेत्र के सैकड़ों लोग रोजाना अपनी समस्याएं लेकर आते थे। लोगों की दिक्कत देखकर इन्होंने सोचा कि प्रॉब्लम्स सॉल्व करने के लिए राजनीति में एंट्री जरूरी है।"
- "इन्होंने काफी हिम्मत कर अपने पिता से चुनाव लड़ने की अनुमति मांगी, लेकिन उन्होंने साफ तौर पर मना कर दिया। जब ये रोज पॉलिटिक्स में आने की बात करने लगे तो इनके पिता ने कहा- आप बंगलुरु में हमारे गुरुजी के पास जाइए और उनसे आदेश लीजिए। अगर वह परमिशन देंगे तो आप चुनाव लड़ सकते हैं।"
- "राजा भैया ने वही किया। गुरुजी की परमिशन के बाद ही राजा भैया 1993 में फर्स्ट टाइम निर्दलीय चुनाव में उतरे थे और विजयी रहे थे। तब से इनका विजय रथ जारी है।"
- राजा भैया ने पहली बार 6 साल की उम्र में घुड़सवारी की थी। उनके पिता उदय प्रताप सिंह चाहते थे कि उनका बेटा ब्रेवरी वाले ही काम ज्यादा करे। उनके यहां एक दर्जन से अधिक घोड़े थे। इनकी कोठी पर घोड़ों की देखभाल करने वाले केदार यादव बताते हैं, "एक बार ये घोड़े पर बैठने की जिद पर अड़ गए। तब वे सिर्फ 6 साल के थे। उस दिन वे काफी देर तक घोड़े पर घूमते रहे। उन्हें बहुत मजा आया कि यह उनका एक शौक बन गया। घुड़सवारी करते हुए कई बार गिरे भी, पसलियां भी टूटीं, लेकिन शौक नहीं गया। आज वे एक बेहतरीन घुड़सवार हैं।"
- राजा भैया के राजनैतिक सफर की शुरुआत से साथ रहे डॉ. कैलाश नाथ ओझा ने बताया, "राजा उदय प्रताप सिंह स्वाभिमानी हैं। उन्होंने आज तक राजा भैया के लिए किसी से वोट नही मांगा। क्षेत्र में अलग छाप होने के बावजूद वह आज तक राजा भैया के चुनाव प्रचार में कभी साथ नहीं रहे। कहा यह भी जाता है कि वह कभी वोट देने भी नहीं जाते।"
महंगी गाड़ियों के शौक़ीन राजा भैया की पसंदीदा बाइक हमेशा से ही बुलेट रही है। उन्होंने पहली बार 12 साल की उम्र में इसकी सवारी की थी। इन्होंने तभी पिता की जीप व फिएट कार चलाना भी सीखा था।
- राजा भैया की पहली खुद की कार ओमनी वैन थी।
राजा भैया लग्जरी गाड़ियों और हथियारों के शौकीन हैं। इनके बेड़े में आज लैंड रोवर, लैंड क्रूजर, बीएमडब्ल्यू जैसी गाड़ियां हमेशा रहती हैं।
- इन्हें निशानेबाजी भी अच्छी लगती है। इनके एफिडेविट के मुताबिक इनके पास दो रिवॉल्वर और चार गन हैं, जिनकी कंबाइन्ड प्राइस लगभग 4 लाख रुपए है।


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